15 सदस्यीय उपसमिति ने सरकार के व्यवहार पर जताया ऐतराज
कहा, सरकार ने मसौदा भेजा न किसी को चर्चा के लिए बुलाया
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर बेअदबी संबंधी कानून को ओर सख्त बनाने संबंधी दिए गए बयान के मद्देनजर, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की 15 सदस्यीय उच्च स्तरीय उपसमिति ने शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित अपने उप-कार्यालय में बैठक की। इस बैठक में विचार-चर्चा के दौरान यह माना गया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा 22 मार्च को दिया गया बयान भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है, क्योंकि राज्य सरकार के पास बेअदबी के संबंधित दो कानून- “जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम 2008” और “पंजाब धार्मिक ग्रंथों के विरुद्ध अपराध निवारण विधेयक 2025” हैं। सरकार इन दोनों कानूनों में से किसमें कड़ी सजा के प्रावधान संबंधी संशोधन करने जा रही है, इस पर भ्रम बना हुआ है।
इस बैठक में मौजूदा विद्वानों ने इस बात पर भी ऐतराज जताया कि मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया यह बयान कि “जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम 2008” में प्रख्यात वकीलों और धार्मिक संस्थानों से परामर्श के बाद संशोधन किया जाएगा, पंजाब सरकार ने अभी तक सिखों के प्रतिनिधि निकाय एसजीपीसी से संपर्क नहीं किया है और न ही “जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम 2008” में किए जाने वाले संशोधनों के संबंध में कोई मसौदा भेजा है। एसजीपीसी की उपसमिति ने अब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को एक 30 पन्नों का पत्र भेजकर पूरी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

उपसमिति की बैठक में शुक्रवार को सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एस. मोहिंदर मोहन सिंह बेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता एस. पूरन सिंह हुंदल, पूर्व जिला अटॉर्नी अधिवक्ता बलतेज सिंह ढिल्लों, पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एस. केहर सिंह, सिख इतिहास अनुसंधान बोर्ड के सदस्य डॉ. परमवीर सिंह और बीबी प्रभजोत कौर, शिरोमणि समिति के सदस्य अधिवक्ता भगवंत सिंह सियालका, अधिवक्ता अमरदीप सिंह धर्नी, अधिवक्ता बरजिंदर सिंह सोढ़ी, शिरोमणि समिति के कानूनी सलाहकार एस. अमनबीर सिंह सियाली और उप सचिव एस. लखवीर सिंह (समन्वयक) ने भाग लिया। बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए उपसमिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एस. मोहिंदर मोहन सिंह बेदी ने कहा कि बैठक में उपसमिति के सभी सदस्यों ने महसूस किया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अपमान को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने संबंधी मुख्यमंत्री का बयान भ्रम की स्थिति पैदा करने वाला है। मुख्यमंत्री द्वारा 22 मार्च को दिया गया बयान “जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम 2008” नामक कानून से संबंधित है और यह अधिनियम श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छपाई, प्रकाशन, वितरण और आपूर्ति से संबंधित है। फिर भी, मुख्यमंत्री द्वारा दिए बयान पर उपसमिति का मानना है कि यह प्रस्तावित “पंजाब पवित्र धार्मिक ग्रंथों के अपमान से संबंधित विधेयक 2025” से संबंधित है, जो सभी धर्मों के धार्मिक ग्रंथों के अपमान पर रोक लगाने संबंधी है। उन्होंने कहा कि उप-समिति का मानना है कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए बयान पंजाब सरकार द्वारा प्रस्तावित “पंजाब पवित्र धार्मिक ग्रंथों के विरुद्ध अपराध निवारण विधेयक 2025” और “जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम 2008” के संबंध में भ्रम पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा इस तथ्य से भी स्पष्ट हो रहा है कि एसजीपीसी द्वारा लगातार पत्रों के माध्यम से, राज्य सरकार के बेअदबी संबंधी कानून के बारे में जानकारी मांगी जा रही है, लेकिन लगातार अनुरोध करने पर भी सरकार इसे साझा नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि विधानसभा सचिव और पंजाब सरकार जानबूझकर अनुरोधित दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने से बच रहे हैं।
