चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने आरोप लगाया है कि बेअदबी के मामलों में इंसाफ देने के संबंध में पंजाब सरकार की मंशा साफ नहीं है। पंजाब कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में परगट सिंह ने कहा कि 13 अप्रैल को एक नया बेअदबी कानून पारित करने के लिए विशेष सत्र बुलाने का दावा राज्य की जनता को गुमराह करने और 2015 के बेअदबी के मामलों में कार्रवाई से बचने का एक स्पष्ट प्रयास है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 2008 के कानून, ‘दी पंजाब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी (प्रिंटिंग प्रेस और प्रकाशन) अधिनियम-2008’ में संशोधन पारित करने जा रही है, जिसके लिए दावा किया गया है कि यह एक नया कानून है, हालांकि इससे सरकार को किसी भी तरह से लाभ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय अविवेकपूर्ण साबित होगा। इस कानून को पारित करने से पहले सभी धर्मों के विशेषज्ञों से परामर्श लिया जाना चाहिए था। उन्होने आगे कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान बिना किसी परामर्श या चर्चा के इस विधेयक को पारित करने जा रहे हैं, जबकि 2008 के कानून में संशोधन करने के बजाय, मान सरकार को संशोधित 2018 कानून को पारित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को केंद्र सरकार से आसानी से मंजूरी मिल जाएगी। जबकि 2008 के विधेयक में नए संशोधन के माध्यम से आपराधिक धारा को शामिल किए जाने के बाद, यह समवर्ती सूची का विधेयक बन जाएगा, जिसके कार्यान्वयन के लिए अनुच्छेद 254 के तहत राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक होगी, जो 2018 के कानून में भी नहीं दी गई थी।
उन्होंने कहा कि सरकार जहां एक तरफ नया कानून लाने की बात कर रही है, वहीं आम आदमी पार्टी की सरकार ने पुराने बेअदबी के मामलों में फाइलों को एक इंच भी आगे नहीं बढ़ाया है। भले ही वह बरगाड़ी कांड हो या बेहबल कलां और मोड़ मंडी विस्फोट, किसी को भी न्याय नहीं मिला है। परगट सिंह ने कहा कि इन मामलों में गोलीबारी और बम विस्फोट शामिल थे और सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई कर सकती थी। लेकिन सरकार सिर्फ अपना अस्तित्व बचाने की कोशिश कर रही है।
बेअदबी कानून पर पंजाब सरकार की नीयत साफ नहीं : परगट सिंह
