गुरुद्वारों का सीसीटीवी रिकॉर्ड 30 दिन बाद हो जाता है डीलिट
दफ्तर के रिकार्ड से छेड़छाड़ की बात जांच रिपोर्ट में उजागर
चंडीगढ़। बहरीन की महिला द्वारा लगाए गए कथित यौन शोषण के आरोपों को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एसजीपीसी का पक्ष रखा। धामी ने माना कि एसजीपीसी की ओर से महिला को एक लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई थी। हालांकि उन्होंने कहा कि महिला ने इलाज के लिए पैसे मांगे थे और एसजीपीसी पहले भी जरूरतमंद लोगों को इलाज या पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता देती रही है। धामी ने आगे कहा कि महिला सात बार गुरुद्वारा साहिब की सराय में ठहरी थी और हर बार उसने खुद अपने रहने का खर्च दिया गया। उन्होंने महिला को किसी भी तरह की गाड़ी या सुरक्षा उपलब्ध करवाने की बात से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि महिला के साथ कौन-कौन लोग रहे, इसका रिकॉर्ड भी एसजीपीसी के पास उपलब्ध नहीं है।
सीसीटीवी रिकॉर्ड को लेकर धामी ने कहा कि गुरुद्वारा परिसरों के सीसीटीवी फुटेज 30 दिन के बाद अपने आप खत्म हो जाते हैं, इसलिए पुराने फुटेज उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कर रही जांच टीम द्वारा पाया गया है कि दफ्तर के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की बात जांच रिपोर्ट में सामने आई है और इसके लिए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। धामी ने कहा कि अमरीक सिंह द्वारा रिकॉर्ड में छेड़छाड़ किए जाने की बात सामने आने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि केवल अमरीक सिंह को अकेला दोषी मानकर मामला खत्म नहीं किया जाएगा, बल्कि रिकॉर्ड से जुड़े उसके अन्य साथियों की भी पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एसजीपीसी प्रधान ने कहा कि मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच के लिए ही सीबीआई जांच की मांग की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार किसी भी तरह एसजीपीसी को नुकसान पहुंचाना चाहती है। धामी ने कहा कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
बहरीन की महिला को एसजीपीसी ने दिए थे एक लाख रुपये: धामी
