चंडीगढ़। बहरीन की महिला से जुड़े मामले को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी के बयानों पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। पन्नू ने कहा कि एसजीपीसी का सम्मान सभी के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन संस्था के कामकाज और उसके संसाधनों को लेकर सवाल पूछना संस्था पर हमला नहीं है। पन्नू ने कहा कि यदि बहरीन की महिला को एसजीपीसी की ओर से एक लाख रुपये दिए गए हैं तो इस पर सवाल क्यों नहीं उठना चाहिए? उन्होंने पूछा कि यह पैसा किस आधार पर दिया गया, किसने मंजूरी दी और इसके लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
पन्नू ने कहा कि कैंसर पीड़ितों को आर्थिक मदद देने के मामलों में भी एसजीपीसी की ओर से तय प्रक्रिया होती है। ऐसे में किसी व्यक्ति को एक लाख रुपये दिए गए हैं तो यह भी बताया जाना चाहिए कि इसके लिए किसकी सिफारिश थी और किस अधिकारी ने मंजूरी दी। उन्होंने सवाल किया कि “ऐसे ही एक लाख रुपये कैसे दे दिए गए? इसके लिए कोई प्रक्रिया तो होगी।” पन्नू ने महिला की मानसिक स्थिति से जुड़े कथित बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में अब महिला को ही मानसिक रूप से अस्वस्थ बताने की दिशा में बात ले जाई जा रही है। पन्नू ने सवाल किया कि यदि महिला ने इलाज के लिए आर्थिक मदद मांगी थी तो उसकी ओर से दिया गया आवेदन सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? उन्होंने महिला को उपलब्ध कराई गई गाड़ियों का पूरा विवरण भी सार्वजनिक करने की मांग की। पन्नू के अनुसार, वाहन अलग-अलग नामों और अधिकारियों के नाम पर उपलब्ध कराए जाने के आरोपों की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि धामी की ओर से महिला को एसजीपीसी की सराय में कई बार कमरा दिए जाने की बात सामने आ रही है। पन्नू ने सवाल किया कि क्या एसजीपीसी को यह पता नहीं था कि कमरों में कौन-कौन लोग ठहरे? पन्नू ने कहा कि आज हरजिंदर सिंह धामी यह मान रहे हैं कि महिला को सात बार कमरा दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह जानकारी संस्था के रिकॉर्ड में थी तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
महिला को एक लाख रुपये दिए तो सवाल क्यों न उठे? : बलतेज पन्नू
