भगवंत मान ने ‘लाल लकीर’ के अंदर बने घरों को दिया मालिकाना हक

दिसंबर तक सभी गांवों-शहरों में ‘लाल लकीर’ के अंदर घरों को मिल जाएंगे प्रापर्टी कार्ड
‘आबादी’ में रहने वाले दलितों, भूमिहीनों के नाम पहली बार सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होंगे
प्रॉपर्टी ओनरशिप कार्ड से लोग अपने घरों के बदले बैंकों से लोन लेने के भी पात्र होंगे

चंडीगढ़/धुरी। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बुधवार को कहा कि राज्य ने ‘लाल लकीर’ के अंदर बने घरों के मालिकाना हक के लिए दशकों से चले आ रहे इंतज़ार को खत्म कर दिया है। उन्होंने ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना के तहत परिवारों को प्रॉपर्टी के मालिकाना हक के सर्टिफिकेट सौंपे। इसके साथ ही एक ऐसी प्रक्रिया की शुरुआत हुई है, जिससे लोगों को कानूनी तौर पर दर्ज मालिकाना हक, प्रॉपर्टी की सीमाओं की मैपिंग और संस्थागत लोन की सुविधा मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से खास तौर पर उन गरीब, दलित और भूमिहीन परिवारों को फायदा होगा जिनके घर पहले सरकारी रिकॉर्ड में शामिल नहीं थे, जबकि सटीक नक्शे और राजस्व रिकॉर्ड से लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी। धुरी में प्रॉपर्टी ओनरशिप कार्ड बांटने के बाद, CM भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य ने पंजाब को ‘लाल लकीर’ से मुक्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, और जल्द ही लगभग 4,000 गांवों को सही रजिस्ट्रेशन मिल जाएंगे।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “’मेरा घर मेरे नाम’ योजना का उद्देश्य हर पात्र परिवार को उनके अपने घर का स्पष्ट मालिकाना हक और दस्तावेज़ी मान्यता प्रदान करना है।” हमारा संकल्प यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र परिवार का घर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो और परिवार को उसके मालिकाना हक को मान्यता देने वाला दस्तावेज़ मिले। यह पहल लोगों के अधिकारों, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा को मज़बूत करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “धुरी रैली में जुटी भारी भीड़ ने यह साबित कर दिया है कि हमारे काम की गूंज पंजाब के हर घर में सुनाई दे रही है। परिवार-केंद्रित राजनीति को खत्म करके, हमने पंजाब को ‘लाल लकीर’ से मुक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत की है। जल्द ही लगभग 4,000 गांवों में प्रॉपर्टी का सही रजिस्ट्रेशन हो जाएगा।”
ड्रोन सर्वे के जरिए तय की संपत्तियों की सीमा
मुख्यमंत्री ने कहा, “इस योजना के तहत संपत्तियों की सीमा तय करने और मैपिंग के लिए ड्रोन सर्वे और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सर्वे के ज़रिए घरों की लोकेशन और सीमाओं की पहचान की जा रही है और मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं। ” उन्होंने कहा, “प्रॉपर्टी कार्ड जारी होने से पात्र लाभार्थियों को अपने घरों के मालिकाना हक से जुड़ी दस्तावेज़ी मान्यता और कानूनी सुरक्षा मिलेगी। प्रॉपर्टी के औपचारिक रिकॉर्ड होने से बैंकों से लोन के लिए अप्लाई करने की प्रक्रिया आसान हो सकती है, लेकिन किसी भी लोन की मंज़ूरी संबंधित बैंक के नियमों और पात्रता शर्तों पर ही निर्भर करेगी।”

पहले चरण में 2295 गांवों में बांटे जाएंगे प्रापर्टी कार्ड
मुख्यमंत्री ने कहा, “पहले चरण में पंजाब के 2,295 गांवों में प्रॉपर्टी कार्ड बांटे जाने का प्रस्ताव है, जिनमें संगरूर जिले के 221 गांव भी शामिल हैं। दूसरे चरण में, पंजाब के 1,668 गांवों में प्रॉपर्टी कार्ड बांटे जाएंगे। तीसरा चरण नवंबर में और चौथा चरण दिसंबर में चलेगा।” उन्होंने कहा कि प्रॉपर्टी कार्ड ज़्यादा से ज़्यादा पात्र लाभार्थियों तक आसानी और व्यवस्थित तरीके से पहुँचाने के लिए चरणबद्ध वितरण की योजना बनाई गई है।

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