पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की
युवाओं के कहा जा रहा, माता-पिता, दादा-दादी के नाम वोटर लिस्ट में दिखाओ
चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष और लुधियाना के सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पंजाब में पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं का मुद्दा उठाया। इन युवाओं को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान वोटर के रूप में अपना नाम दर्ज कराने से रोक दिया गया है। वडिंग ने कहा कि पंजाब के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के वे युवक-युवतियां, जिनकी उम्र 18 वर्ष हो चुकी है और जिन्होंने फार्म-6 के जरिए वोटर बनने के लिए आवेदन किया, उनसे इसके बजाय यह साबित करने को कहा गया कि उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम दो दशक से भी पहले हुई पिछली गहन मतदाता सूची में दर्ज था।
अपने पत्र में वडिंग ने अमित शाह से केंद्रीय गृह मंत्री के तौर पर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि नागरिकता अधिनियम, 1955 से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी केंद्र सरकार के पास है। उन्होंने गृह मंत्रालय से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज सभी सरकारी संस्थाओं और चुनाव आयोग द्वारा मान्य होंगे। वडिंग ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 326 वोटर बनने के लिए नागरिकता, 18 वर्ष की उम्र पूरी करना और संबंधित क्षेत्र में सामान्य रूप से रहना मुख्य शर्तें बताता है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वोटर के रूप में नाम दर्ज कराने का अधिकार लगातार उपलब्ध रहने वाला अधिकार है। उन्होंने कहा कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट, 1950 के तहत योग्य लोगों के नाम मतदाता सूची में लगातार अपडेट की प्रक्रिया के माध्यम से जोड़े जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कानून में साल में चार तारीखें तय की गई हैं, जिनके आधार पर नए वोटरों का पंजीकरण किया जा सकता है, इसलिए चल रही SIR की वजह से योग्य पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं को मतदाता सूची से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “जिन युवाओं को इस प्रक्रिया के दौरान वापस भेज दिया गया, उनके नाम अगले महीने तैयार होने वाली मतदाता सूची में नहीं होंगे। यही वह सूची है जिसे पंजाब 2027 के चुनाव में इस्तेमाल करेगा।”
