मान सरकार ने दुकानदारों को दिया दिवाली का तोहफा, ‘मेरी दुकान, मेरे नाम’योजना शुरू

1 अप्रैल 2020 से पहले 12 वर्षों से कानूनी कब्जे वाले दुकानदार करें आवेदन
6 नवंबर तक स्थानीय निकायों के कार्यालयों में आवेदन जमा करवाए जा सकते हैं
चंडीगढ़। राज्य के लाखों दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को दिवाली से पहले तोहफा देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा गुरुवार को “मेरी दुकान, मेरे नाम” योजना की शुरुआत की गई। इस योजना से नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के अधीन 12 वर्षों से अधिक समय से किराए या लीज पर कानूनी रूप से दुकानें चला रहे दुकानदारों के लिए इन दुकानों का मालिक बनने का रास्ता साफ हो गया है।
गुरुवार को पंजाब भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस योजना की घोषणा करते हुए पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि इस योजना के तहत योग्य दुकानदार अपनी दुकानों के मालिकाना हक प्राप्त करने के योग्य हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2020 से पहले के 12 वर्षों के कानूनी कब्जे को साबित करने वाला कोई भी दुकानदार इस योजना के लिए आवेदन करने का पात्र होगा। इस पहल का लाभ नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के अधीन काम कर रहे उन व्यापारियों को मिलेगा, जो बिना मालिकाना हक के किराए या लीज पर दुकानें चला रहे हैं। बैंस ने बताया कि इस संबंध में आवेदन 6 नवंबर 2026 तक नगर परिषद और नगर निगम कार्यालयों में जमा करवाए जा सकते हैं और यह पूरी प्रक्रिया समयबद्ध होगी। आवेदनों की जांच एसडीएम स्तर की कमेटी द्वारा की जाएगी, जबकि कीमत निर्धारित करने का कार्य डीसी स्तर की कमेटी करेगी और संबंधित स्थानीय संस्थाओं द्वारा प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
कीमतों के वर्गीकरण के बारे में जानकारी देते हुए हरजोत बैंस ने बताया कि 3 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवेदकों को कलेक्टर रेट का केवल 12.5 प्रतिशत भुगतान करना होगा। इसी तरह 3 से 8 लाख रुपये की आय वाले निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के आवेदक 25 प्रतिशत, 8 से 15 लाख रुपये की आय वाले मध्यम आय वर्ग (एमआईजी) के आवेदक 50 प्रतिशत और 15 लाख रुपये से अधिक आय वाले आवेदक कलेक्टर रेट का 100 प्रतिशत भुगतान करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि ये रियायती दरें 50 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल वाली दुकानों पर लागू होंगी।
स्थानीय निकाय मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस योजना में दो श्रेणियों को शामिल नहीं किया गया है। इस योजना के तहत सब-टेनेंटों को अनुमति नहीं दी जाएगी और न ही पार्कों, गलियों या सार्वजनिक सुविधाओं वाली जगहों पर कब्जा करने वाले लोगों को मालिकाना हक दिए जाएंगे।

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