उत्तराखंड में आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस में पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन ने रखे विचार
चंडीगढ़। खाद्यान्नों के नुकसान और बर्बादी को रोकना समय की एक बड़ी जरूरत बन चुका है। इस दिशा में देश की मंडियों को आधुनिक तकनीक से लैस करने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे, स्टोरेज, कोल्ड चेन और ट्रांसपोर्टेशन प्रबंधों को और मजबूत करने की आवश्यकता है। यह विचार पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन और नेशनल काउंसिल ऑफ स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड्स (कौसांब) के चेयरमैन हरचंद सिंह बरसट ने उत्तराखंड में आयोजित राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के दौरान व्यक्त किए।
उत्तराखंड स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड के चेयरमैन अनिल डब्बू की अध्यक्षता में होटल कॉर्बेट एलिगेंट रिट्रीट रामनगर उत्तराखंड में 28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन फूड लॉस एंड वेस्ट इन होलसेल फ्रूट एंड वेजिटेबल मार्केट्स का आयोजन किया गया है। इंटरनेशनल डे आफ अवैयर्नेस आफ फूड लास और वेस्ट के मौके पर आयोजित इस कांफ्रेंस में हिमाचल प्रदेश स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड के चेयरमैन कुलदीप सिंह, असम एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड के चेयरमैन मनोज बरुआ, हिमाचल प्रदेश स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड के एमडी राम कुमार गौतम (आईएएस) कौसांब के एमडी डॉ. जेएस यादव सहित देश के विभिन्न राज्यों के मंडी बोर्डों के अधिकारियों ने शिरकत की।
कांफ्रेंस के दौरान हरचंद सिंह बरसट ने अपने उद्घाटन संबोधन में खाद्यान्न के महत्व और इनकी सही संभाल की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि खाद्यान्न की बर्बादी को किसी भी स्तर पर अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने गहरी चिंता प्रकट की कि कुल उत्पादन का लगभग 30 फीसदी हिस्सा बर्बाद हो जाता है। यह बर्बादी ना सिर्फ आर्थिक नुकसान का कारण बनती है, बल्कि इससे पैदा होने वाली हानिकारक गैसें पर्यावरण को भी गंभीर रूप से दूषित कर रही हैं। बरसट ने कहा कि फूड के नुकसान और बर्बादी को घटाने के लिए मंडी प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों को अपनाना समय की मुख्य जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में मंडी प्रबंधन की प्रणालियों में अंतर हैं। इसलिए पूरे भारत में मंडियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एकसमान प्रोटोकॉल तैयार करने की आवश्यकता है, ताकि फूड के नुकसान और बर्बादी को कम किया जा सके।
खाद्यान्नों की बर्बादी रोकने के लिए मंडी सिस्टम को मजबूत बनाना जरूरी : बरसट
