चंडीगढ़। भारत की मिनर्वा एकेडमी ने प्रतिष्ठित गोथिया कप 2026 (वर्ल्ड यूथ कप) की ट्रॉफी अपने नाम कर अंतरराष्ट्रीय युवा फुटबॉल के सर्वोच्च शिखर को छू लिया है। स्वीडन के गोथेनबर्ग में 13 जुलाई से 19 जुलाई, 2026 तक आयोजित किए गए 2026 गोथिया कप (वर्ल्ड यूथ कप) के बेहद रोमांचक फाइनल मुकाबले में मिनर्वा एकेडमी ने ब्राजील की दिग्गज टीम आरएस स्पोर्ट्स को 2-1 से शिकस्त दी। युवाओं के इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फुटबाल टूर्नामेंट में U-11 से U-19 आयु वर्ग की 1,700 से ज़्यादा टीमें और 40,000 से ज़्यादा खिलाड़ी शामिल हुए।
इस ऐतिहासिक जीत ने भारतीय क्लब के उस अविश्वसनीय रिकॉर्ड पर मुहर लगा दी है कि जब भी मिनर्वा एकेडमी यूरोप की धरती पर कदम रखती है, वह अजेय चैंपियन बनकर ही लौटती है। हाल ही में फिनलैंड में हेलसिंकी कप जीतने के बाद, इन युवा योद्धाओं ने स्वीडन में भी अपना महाद्वीपीय दबदबा कायम रखा और दुनिया की सर्वश्रेष्ठ यूथ अकादमियों के सामने पूरी तरह अपराजेय रहे।
यह महामुकाबला 18 जुलाई को भारतीय समयानुसार दोपहर 3:45 बजे खचाखच भरे स्टेडियम में शुरू हुआ। अपनी कलात्मकता और तकनीकी कौशल के लिए जानी जाने वाली दिग्गज ब्राजीलियाई टीम के खिलाफ, मिनर्वा ने अपने सिग्नेचर हाई-प्रेस और अनुशासित रणनीति पर भरोसा जताया।
मैच में पहली सफलता 10वें मिनट में ही मिल गई, जब टूर्नामेंट के स्टार खिलाड़ी टी. किपगेन ने पेनल्टी एरिया के अंदर जगह बनाई और शानदार शॉट लगाकर स्कोर 1-0 कर दिया। आरएस स्पोर्ट्स ने इसका आक्रामक जवाब दिया और जवाबी हमलों की झड़ी लगा दी, जिसने अंततः पहले हाफ के उत्तरार्ध में मिनर्वा के डिफेंस को भेद दिया। इस तरह फुटबॉल की यह शतरंज जैसी बाजी हाफ-टाइम के ब्रेक तक 1-1 की तनावपूर्ण बराबरी पर पहुंच गई।
दूसरा हाफ भारतीय टीम की ओर से जज्बे, फोकस और रणनीतिक सूझबूझ का बेजोड़ नमूना था। जहां एक तरफ मिडफील्ड यूनिट ने ब्राजीलियाई टीम के पजेशन गेम को ध्वस्त किया, वहीं दूसरी तरफ डिफेंडर्स ने स्कोर बराबर रखने के लिए अपनी जान लगा दी। जीत का वह ऐतिहासिक पल आखिरकार 49वें मिनट में आया। रेगुलर टाइम खत्म होने में जब दो मिनट से भी कम का समय बचा था, तब एक बेहद तेज और सटीक मूव ने नोंगरेम को बॉक्स के अंदर ढूंढ निकाला। अत्यधिक दबाव के बीच जबरदस्त संयम दिखाते हुए, उन्होंने ब्राजीलियाई गोलकीपर को छकाते हुए एक घातक शॉट दागा और स्कोर 2-1 कर दिया। मिनर्वा ने इंजरी टाइम के आखिरी पलों को बेहद सूझबूझ से निकाला और जैसे ही फाइनल व्हिसल बजी, टीम ने ग्लोबल टाइटल अपने नाम कर जश्न का सैलाब ला दिया।
मिनर्वा एकेडमी टीम ने प्रतियोगिता में खेले अपने सभी 8 मैचों में जीत हासिल कर 100 प्रतिशत विन-रेट के साथ अजेय रहने का गौरव प्राप्त किया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि पूरे सफर के दौरान मिनर्वा के फारवर्ड लाइन ने विरोधी टीमों के डिफेंस को तहस-नहस करते हुए कुल 86 गोल दागे, जबकि उनके मजबूत डिफेंस ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ 7 गोल खाए। वैश्विक मंच पर ब्राजील, फ्रांस और बोलिविया जैसे देशों की युवा टीमों को पछाड़कर मिली इस ऐतिहासिक खिताबी जीत ने साबित कर दिया है कि भारत में फुटबॉल का भविष्य बेहद सुरक्षित और सुनहरे हाथों में है।
