आप ने 1984 के पीड़ितों के साथ की राजनीति, उनके दर्द का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए किया: फूलका

कहा- सज्जन कुमार की शोक सभा में आप विधायक की भागीदारी से आप के दोहरे मापदंड उजागर

चंडीगढ़। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध अधिवक्ता एच.एस. फूलका ने आम आदमी पार्टी (आप) पर 1984 के सिख विरोधी नरसंहार के पीड़ितों के साथ राजनीति करने और उनके दर्द का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आप ने पीड़ितों के लिए वास्तविक रूप से न्याय की लड़ाई लड़ने के बजाय उनके दर्द को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।
प्रदेश मीडिया प्रमुख विनीत जोशी की उपस्थिति में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए फूलका ने कहा कि 1984 के मुद्दे पर आप द्वारा हाल में किए गए प्रदर्शन राजनीतिक पाखंड का उदाहरण हैं। उन्होंने विशेष रूप से आप विधायक राम सिंह नेताजी की पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार कि शोक सभा में भागीदारी पर सवाल उठाया। सज्जन कुमार को 1984 के सिख विरोधी नरसंहार से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराया जा चुका है।
फूलका ने कहा कि पीड़ितों ने न्याय के लिए दशकों तक इंतजार किया है और उनके दुख-दर्द को कभी भी राजनीतिक हथकंडे में नहीं बदला जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “जो लोग वास्तव में पीड़ितों के साथ खड़े होने का दावा करते हैं, वे एक साथ उन लोगों के प्रति एकजुटता कैसे व्यक्त कर सकते हैं, जिन्हें पीड़ितों के खिलाफ हुए अपराधों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया है।”
आप ने राजनीतिक कारणों से मुआवजा देने में देरी की
मुआवजे का उल्लेख करते हुए फूलका ने कहा कि 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 1984 के नरसंहार के प्रत्येक पीड़ित परिवार को अतिरिक्त ₹5 लाख मुआवजा देने की घोषणा की थी। केंद्र सरकार ने राज्यों को जल्द से जल्द मुआवजा वितरित करने के निर्देश दिए थे, क्योंकि पीड़ित परिवार पहले ही लगभग 30 वर्षों तक इंतजार कर चुके थे। कई राज्यों में मुआवजा वितरित कर दिया गया, लेकिन दिल्ली में आप सरकार के सत्ता में आने के बाद इसमें देरी की गई। उन्होंने कहा, “मैंने आप सरकार से बार-बार मुआवजा वितरित करने का अनुरोध किया। केंद्र सरकार द्वारा धनराशि पहले ही मंजूर की जा चुकी थी। लेकिन मुझे बताया गया कि इसे तुरंत देने का कोई मतलब नहीं है और इसे पंजाब विधानसभा चुनावों के नजदीक दिया जा सकता है।” फूलका ने कहा कि मुआवजे में देरी के विरोध में उन्होंने सितंबर 2015 में सभी पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 1 नवंबर 2015 को दिल्ली सरकार ने तिलक विहार में आयोजित एक कार्यक्रम में अतिरिक्त मुआवजा वितरित किया। उन्होंने कहा, “पीड़ित पहले ही 30 वर्षों तक इंतजार कर चुके थे। उनके दुख-दर्द को कभी भी चुनावी गणनाओं के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए था।”
भाजपा चार दशकों से पीड़ितों के साथ खड़ी रही
फूलका ने कहा कि 1984 के पीड़ितों को न्याय दिलाने के मुद्दे पर उनका भाजपा के साथ जुड़ाव लगभग चार दशक पुराना है, हालांकि उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता हाल ही में ग्रहण की है। उन्होंने याद किया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना के कार्यकाल के दौरान वे उनके सलाहकार रहे और भाजपा के वरिष्ठ अधिवक्ताओं एवं नेताओं, जिनमें अरुण जेटली और रविशंकर प्रसाद शामिल थे, ने नरसंहार से जुड़े मामलों में पीड़ितों की ओर से पैरवी की। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल और अब नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान ही 1984 के नरसंहार के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिली।

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