आम बिजली उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डालने का लगाया आरोप
चंडीगढ़। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पूर्व मंत्री प्रो. सम्पत सिंह ने आरोप लगाया है कि हरियाणा के बिजली वितरण निगम अपनी वित्तीय विफलताओं और कुप्रबंधन का बोझ आम बिजली उपभोक्ताओं पर डाल रहे हैं, जबकि प्रभावशाली कंपनियों को बिना एक भी यूनिट बिजली लिए करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा है।
चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि बिजली निगमों ने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) से मल्टी ईयर टैरिफ-2024 के तहत 1,134.54 करोड़ रुपये तथा उस पर लगने वाली कैरीइंग कॉस्ट (ब्याज) को आने वाले वर्षों में सभी उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति मांगी है। उन्होंने कहा कि निगम स्वयं 27,915 करोड़ रुपये के घाटे और 27,248 करोड़ रुपये के कर्ज की बात स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अक्टूबर 2025 में सिक्किम ऊर्जा लिमिटेड (ग्रीनको समूह) को बिना बिजली आपूर्ति के 1,300 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि जब एफएसए (फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट) की राशि उपभोक्ताओं को लौटानी थी, तब निगमों ने कोई याचिका दायर नहीं की। लेकिन जैसे ही वसूली उनके पक्ष में हुई, उन्होंने तुरंत दो याचिकाएं दाखिल कर दीं। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम अपनी देरी से होने वाली वसूली पर ब्याज चाहते हैं, जबकि उपभोक्ताओं का पैसा महीनों तक रोकने पर कोई ब्याज नहीं देते।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय अपने हालिया फैसलों में स्पष्ट कर चुका है कि राज्य विद्युत विनियामक आयोग सरकार के अधीन नहीं हैं और उन्हें स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से कार्य करना चाहिए। प्रो. सम्पत सिंह ने सवाल उठाया कि अब देखना यह है कि हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग 84 लाख बिजली उपभोक्ताओं के हित में कानून के अनुसार फैसला देता है या सरकार और बिजली निगमों के दबाव में काम करता है।
