
चंडीगढ़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) की तीन दिवसीय बैठक शुक्रवार को समालखा (हरियाणा) में शुरू हुई। इस बैठक का उद्घाटन आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत और महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने किया। आरएसएस के संगठनात्मक दृष्टिकोण से, एबीपीएस संघ का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है।
इस बैठक में बीते एक वर्ष के दौरान आरएसएस के कार्यों के विस्तार और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन और इससे जुड़े 32 संगठनों के अध्यक्ष व अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी अखिल भी हिस्सा लेंगे। इस वर्ष संघ का शताब्दी उत्सव मनाया जा रहा है, इसलिए बैठक में समारोहों के हिस्से के रूप में आयोजित प्रमुख कार्यक्रमों और अभियानों पर विस्तृत चर्चा होगी। इनमें गृहसंपर्क (जन संपर्क कार्यक्रम), हिंदू सम्मेलन, युवा सम्मेलन, प्रमुख नागरिकों की सभाएं और सामाजिक सद्भाव की बैठकें भी शामिल हैं। शताब्दी वर्ष के दौरान शाखाओं के विस्तार और जनसंपर्क अभियानों पर विशेष बल दिया जा रहा है। केरल में, इस जनसंपर्क पहल के अंतर्गत 55,000 से अधिक मुस्लिम और 54,000 ईसाई परिवारों को शामिल किया गया।
बैठक के पहले दिन, संघ ने देश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बारे में माना कि सरकार के प्रयासों के कारण स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, जबकि मणिपुर में भी हालात में सुधार हुआ है। वहीं, संघ ने बांग्लादेश के संदर्भ में, वहां की सरकार से हिंदुओं के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाने का आग्रह किया।
