चिट्टा, केबल, बस, गैंगस्टर, माफिया के बाद अब देह व्यापार में अकाली नेता : बलतेज पन्नू

मोगा देह व्यापार के आरोप में अकाली नेता और एमसी जगजीत सिंह जीता की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने शिरोमणि अकाली दल (बादल) पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि आज एक बार फिर उनका घिनौना चेहरा जनता के सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि अकाली दल का इतिहास काले कामों से भरा है। 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार के दौरान पंजाब ने जो संताप झेले, उनकी लिस्ट बहुत लंबी है। चाहे गोरे लोगों का काला धंधा हो, केबल माफिया हो, बस का धंधा हो या गैंगस्टर कल्चर को बढ़ावा देना हो, हर जगह अकाली नेताओं की सीधी संलिप्तता साफ दिखती थी।
बलतेज पन्नू ने मोगा के ताजा घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि वहां एक अकाली नेता और एमसी जगजीत सिंह जीता को देह व्यापार का धंधा चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जिस होटल में लड़कियों से यह गलत काम करवाया जा रहा था, उसका मालिक जगजीत सिंह जीता है। छापेमारी के दौरान पुलिस को मौके से कई लड़कियां मिलीं, जिनमें एक नाबालिग लड़की का मिलना बहुत दिल दहला देने वाला और चिंता की बात है। पन्नू ने सवाल उठाया कि गिरफ्तारी के इतने घंटे बाद भी किसी बड़े अकाली नेता ने इस पर कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी? क्या उनकी चुप्पी सीधे तौर पर अपराधियों का समर्थन करना है?
अकाली दल की ‘पंजाब बचाओ यात्रा’ पर तंज कसते हुए पन्नू ने कहा कि मोगा में इस रैली के दौरान जगजीत सिंह जीता की सीनियर अकाली नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आई हैं। उन्होंने पूछा कि क्या ये लोग ऐसे ही पंजाब को बचाएंगे? जिनके हाथ ऐसे धंधों से सने हैं जो मासूम लड़कियों का भविष्य अंधेरे में धकेलते हैं, उन्हें पंजाब बचाने की बात करना शोभा नहीं देता। पन्नू ने कहा कि मोगा में पहले भी सामने आए सेक्स स्कैंडल में कई सीनियर अकाली नेताओं के नाम सामने आए हैं, जिससे साबित होता है कि यह पार्टी अनैतिकता और बुरे धंधों का गढ़ बन गई है। पन्नू ने पंजाब के लोगों से अपील की कि आज पंजाब को किसी और से नहीं बल्कि ऐसे लोगों से बचाने की ज़रूरत है जिन्होंने अपने निजी फायदे और लालच के लिए कोई भी बुरा धंधा नहीं छोड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आप सरकार ऐसे किसी भी अपराधी को बख्शने वाली नहीं है, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो।

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