चंडीगढ़। पंजाब पुलिस ने फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के दौरान सक्रिय एक अंतरराज्यीय हाईटेक नकल गिरोह का बड़ा पर्दाफाश किया है। फरीदकोट रेंज पुलिस, फिरोजपुर रेंज पुलिस और पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस (सीआई) विंग ने संयुक्त अभियान चलाकर इस संगठित गिरोह को बेनकाब किया। कार्रवाई के दौरान गिरोह के 7 प्रमुख संचालकों और 28 अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 27 बैटरी चालित वायरलेस नकल उपकरण भी बरामद किए हैं।
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था और किसी सरकारी अधिकारी या परीक्षा प्रणाली की कोई भूमिका सामने नहीं आई है।पुलिस के अनुसार, 19 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक आयोजित परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद गिरोह ने पेन कैमरे और मोबाइल तकनीक के जरिए प्रश्नपत्र की तस्वीरें बाहर भेज दीं। फिरोजपुर परीक्षा केंद्र पर परीक्षा दे रहे एक अभ्यर्थी ने छिपे हुए पेन कैमरे से प्रश्नपत्र स्कैन कर उसे व्हाट्सएप के माध्यम से हरियाणा के भिवानी निवासी एक सहयोगी को भेजा। वहां से प्रश्नपत्र राजस्थान और फरीदकोट में मौजूद अन्य आरोपियों तक पहुंचा, जिन्होंने एक अस्थायी कंट्रोल रूम से वायरलेस उपकरणों के जरिए परीक्षा केंद्रों में बैठे अभ्यर्थियों को वास्तविक समय में उत्तर बताने शुरू कर दिए।
जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड फाजिल्का स्थित संत कबीर पॉलिटेक्निक कॉलेज का कर्मचारी गुरमीत सिंह है। गिरोह परीक्षा पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से 3.5 लाख रुपये से लेकर 13 लाख रुपये तक वसूलता था। कई अभ्यर्थियों से सुरक्षा के तौर पर पोस्ट डेटेड चेक भी लिए गए थे। परीक्षा वाले दिन आरोपियों ने फरीदकोट-कोटकपूरा रोड स्थित एक होटल में एकत्र होकर विशेष वायरलेस उपकरण अभ्यर्थियों में वितरित किए थे। पंजाब पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में बड़ी सफलता है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जा रही है। पुलिस वित्तीय लेनदेन, गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। साथ ही फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है। पुलिस ने दोहराया कि अब तक की जांच में परीक्षा प्रणाली के भीतर किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं और परीक्षा प्रणाली सुरक्षित एवं निष्पक्ष पाई गई है।
