चंडीगढ़। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की हरियाणा राज्य कमेटी ने दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस दमन और पार्टी नेताओं की गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा की है। प्रेस बयान जारी करते हुए राज्य सचिवमंडल सदस्य कॉमरेड सुरेंद्र मलिक ने कहा कि प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित करने वाली एसआईआर प्रक्रिया वापस लेने और चुनाव सुधारों की मांग कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने तानाशाही रुख अपनाते हुए दिल्ली में लगभग कर्फ्यू जैसे हालात बना दिए। इंटरनेट बंदी, 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और परिवहन पर प्रतिबंधोंउ के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरे हैं। पार्टी महासचिव एम.ए. बेबी, पिनाराई विजयन, बृंदा करात, एम.वी. गोविंदन, विजयराघवन, के.के. शैलजा, थॉमस आइजैक, के.एन. बालगोपाल, पी. राजीव, जॉन ब्रिटास सहित अनेक नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया। वहीं, बी.वी. राघवुलु, अरुण कुमार, विजू कृष्णन, मरियम धवले, ए.आर. सिंधु सहित अन्य नेताओं को मिंटो रोड के पास मार्च के प्रयास के दौरान गिरफ्तार किया गया। वरिष्ठ नेता माणिक सरकार, तपन सेन, सुभाषिनी अली सहगल, यू वासुकी, अशोक धवले, हरियाणा के राज्य सचिव प्रेमचंद भी गिरफ्तार किए गए। हरियाणा में कई जगहों पर छात्र नौजवानों को पुलिस द्वारा डिटेन किया गया है। घरों में नजर बंद किया गया है। दो दिनों से पुलिस की दमनात्मक कार्रवाई चल रही है।
कॉमरेड सुरेंद्र सिंह ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार जनविरोध और चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों से घबराकर दमन का सहारा ले रही है। मताधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है। वास्तविक मतदाताओं को इससे वंचित करना और शांतिपूर्ण विरोध को कुचलना लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है।
शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वालों पर दमनात्मक कार्रवाई घोर निंदनीय: माकपा
