शिअद (पुनरसुरजीत) का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री भगवंत मान से मिला
चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (पुनरसुरजीत) के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को चंडीगढ़ में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। यह बैठक लगभग आधे घंटे तक चली, जिसमें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के सदस्य अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उसके बाद हुई गंभीर घटनाओं पर गंभीरता से चर्चा की गई। शिरोमणि अकाली दल (पुनरसुरजीत) के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में करनैल सिंह पीरमुहम्मद, मास्टर मिठू सिंह कानेके, गुरबख्श सिंह पड़ैन, भुपिंदर सिंह शेखपुर और दविंदर सिंह सोढी शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा जिसमें मांग की गई कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि बहरीन से नई दिल्ली आईं महिला और उनकी बहू के लिए हवाई टिकट का इंतज़ाम किसने किया और उन्हें यहां लाने का मकसद क्या था? नई दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी के बाद नाभा जेल में उस महिला को दी गई वीआईपी सुविधाएं और क्या वह उस समय वहां बंद बिक्रम सिंह मजीठिया से मिली थीं? इस बारे में भी तथ्यों को सामने लाया जाए। नाभा जेल से रिहा होने के बाद, किन लोगों की गाड़ियों और किन संपर्कों के ज़रिए उस महिला को श्री आनंदपुर साहिब स्थित ‘भाई बचित्र सिंह निवास’ पहुंचाया गया?
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिरोमणि यूथ अकाली दल (बादल) के अध्यक्ष सरबजीत सिंह झिंजर की भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए। यह जांच चुनाव टिकट हासिल करने, जेल से रिहाई में मदद करने और अकाली नेता विरसा सिंह वाल्टोहा से संपर्क कराने के मामलों में उनकी भूमिका के संबंध में की जानी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि महिला के आरोपों के अनुसार, ज्ञानी मलकीत सिंह (श्री अकाल तख्त साहिब के अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी), ड्राइवर मोहन सिंह और मेजर सिंह कविशर की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। यह भी पता लगाया जाए कि इन आठ महीनों के दौरान यह महिला किन-किन लोगों से मिली? एसजीपीसी की देखरेख में इस बात की जांच होनी चाहिए कि उन्होंने उसे अपनी सुविधाओं के बीच क्यों ठहराया। इस मामले में तख्त श्री केसगढ़ साहिब के मैनेजर से लेकर सेवादारों तक, सभी से पूछताछ की जानी चाहिए। एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी अमरजीत सिंह चावला को विदेश जाने में किसने मदद की और किसने उसे ‘सुरक्षित रास्ता’ दिया, इस सच्चाई का भी पता लगाया जाना चाहिए।
श्री आनंदपुर साहिब की घटना की 15 दिन के भीतर एसआईटी जांच कराने की मांग
