जालंधर में पंजाब भाजपा की ‘नशामुक्त पंजाब यात्रा’के समापन अवसर पर किया ऐलान
जालंधर। भारतीय जनता पार्टी पंजाब का आगामी विधानसभा चुनाव राज्य को नशामुक्त करने के मुद्दे पर लड़ेगी और भाजपा सरकार बनने पर 31 दिसंबर 2029 से पहले राज्य को नशामुक्त करेगी। यह घोषणा बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जालंधर के परागपुर में भाजपा की नशामुक्त पंजाब यात्रा के समापन अवसर पर आयोजित विशाल रैली को संबोधित करते हुए की। इस अवसर पर पंजाब भाजपा के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों, अश्वनी शर्मा, विजय सांपला, श्वेत मलिक, अविनाश राय खन्ना, मनोरंजन कालिया, सुनील जाखड़, परनीत कौर और सुशील कुमार रिंकू ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर तरुण चुघ, संदीप पाठक, राघव चड्ढा, सतनाम सिंह संधू, अशोक कुमार मित्तल, विक्रम सिंह साहनी और हरभजन सिंह (सभी राज्यसभा सदस्य), अनिल सरीन, मनप्रीत सिंह बादल, मनोरंजन कालिया, इकबाल सिंह लालपुरा, राणा गुरमीत सिंह सोढी, सोम प्रकाश, मनजिंदर सिंह सिरसा, रवनीत सिंह बिट्टू, विनीत जोशी, दिनेश बब्बू, जीवन गर्ग, अमनजोत कौर, चरणजीत सिंह अटवाल सहित पंजाब भाजपा के नेता और राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
शाह ने कहा कि पंजाब में किसानों, महिलाओं, युवाओं, उद्योग और खराब आर्थिक स्थिति से जुड़े कई मुद्दे हैं, लेकिन भाजपा नशामुक्त पंजाब के मुद्दे पर चुनाव लड़ने जा रही है। उन्होंने कहा कि वह पंजाब की महिलाओं और युवाओं से वादा करते हैं कि 31 दिसंबर 2029 से पहले पंजाब को नशे से मुक्त कर देंगे। इसी उद्देश्य से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने 18 सितंबर को पठानकोट से यात्रा शुरू की थी, जो 13 दिनों में चार हजार किलोमीटर का सफर तय करके यहां पहुंची है।अमित शाह ने कहा कि नशे के बारे में इस डेडलाइन को लेकर केजरीवाल एंड पार्टी क्या कहने वाली है, यह उन्हें पता है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने जो कहा, वह करके दिखाया है। कश्मीर से धारा 370, उत्तर-पूर्व के आतंकवाद और नक्सलवाद को खत्म करने के बाद अब बारी पंजाब को चिट्टा मुक्त करने की है।
शाह ने दावा किया कि केंद्र में कांग्रेस के (2004-2014) दस साल के शासन के दौरान चिट्टा पकड़ने के 26 लाख मामले बने थे, जबकि नरेंद्र मोदी सरकार (2014 से 2024) के दौरान 1 करोड़ 20 लाख मामले पकड़े गए। उन्होंने आंकड़े गिनाते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से सीधे सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि पिछले साल भारत में एक नशा विरोधी विशेष कानून (एनडीपीएस एक्ट) के तहत पांच हजार लोगों को सजा देकर जेल भेजा गया और बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ और गैर-कानूनी संपत्ति जब्त किए। लेकिन पंजाब में एक भी व्यक्ति को इस कानून के तहत सजा नहीं हुई। क्या इसका जवाब मुख्यमंत्री भगवंत मान दे सकते हैं? उन्होंने पूछा कि पंजाब सरकार एन-कोर्ट की बैठकों में दो साल से शामिल क्यों नहीं हुई?
