मीडिया वेल बीइंग एसोसिएशन का हरियाणा में उपमंडल स्तर तक होगा विस्तार : धरणी

नारायणगढ़ की बैठक में संगठन विस्तार, पत्रकार कल्याण योजनाओं पर हुई चर्चा

नारायणगढ़ (अंबाला)। मीडिया वेल बीइंग एसोसिएशन (एमडब्ल्यूबी) की महत्वपूर्ण बैठक उत्तर भारत के अध्यक्ष चंद्र शेखर धरणी की अध्यक्षता में नारायणगढ़ में आयोजित हुई। बैठक में संगठन के विस्तार, पत्रकार कल्याण और विभिन्न लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान उत्तर भारत के कोषाध्यक्ष तरुण कपूर, अंबाला जिलाध्यक्ष राजीव ऋषि, हरियाणा आईटी सेल संयोजक पीयूष जैन सहित अनेक पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे।
नारायणगढ़ से राजेश वर्मा, वीरेंद्र मोहन वालिया, सुशील शर्मा, प्रमोद वर्मा, धर्मवीर कौशिक,सुशील बरौली,बराड़ा से अनिल शर्मा शुभम भी मौजूद थे।
बैठक में संगठन की कोर कमेटी द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी देते हुए चंद्र शेखर धरणी ने बताया कि एमडब्ल्यूबी अब पूरे हरियाणा में उपमंडल (सब डिवीजन) स्तर पर संगठन का विस्तार करेगी। प्रत्येक उपमंडल में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, सह सचिव, कोषाध्यक्ष तथा पांच सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा। ये इकाइयां जिला एवं प्रदेश कार्यकारिणी के साथ समन्वय स्थापित करते हुए पत्रकारों की समस्याओं के समाधान और संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करेंगी। आने वाले समय में उपमंडल एवं ब्लॉक स्तर पर गोष्ठियां, प्रशिक्षण शिविर और पत्रकार हितों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

धरणी ने कहा कि एमडब्ल्यूबी वर्तमान में हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। संगठन पिछले छह वर्षों से पत्रकारों को बिना किसी सदस्यता शुल्क के 10-10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा तथा 10-10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा संस्थापक सदस्यों एवं उनके परिवारों को 33 लाख रुपये तक की कैशलेस मेडिकल पॉलिसी भी निःशुल्क प्रदान की जा रही है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्रकार हितों से जुड़ा मांगपत्र सौंपा गया है। इसमें पत्रकारों की मासिक पेंशन 30 हजार रुपये करने, पेंशन नियमों को सरल बनाने, डिजिटल पत्रकारों को लाभ देने, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, पारिवारिक पेंशन, आवासीय योजनाएं, सरकारी बसों में आरक्षित सीटें तथा पत्रकारों के बच्चों के लिए शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में तीन प्रतिशत आरक्षण जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।

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