नई दिल्ली। नोएडा में सोमवार को फैक्ट्री श्रमिकों के हिंसक आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार नींद से जागी और मंगलवार को सरकार ने सभी श्रेणियों के फैक्ट्री श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का ऐलान कर दिया। बढ़ाई गई न्यूनतम मजदूरी दरों को गत एक अप्रैल से पूर्वव्यापी रूप से प्रभावी किया गया है, यानी मौजूदा कार्यरत श्रमिकों को उनका अप्रैल माह का वेतन बढ़ी हुई दर के हिसाब से मिलेगा। गौरतलब है कि सोमवार 13 अप्रैल के नोयडा में फैक्ट्री श्रमिकों द्वारा वेतन वृद्धि और काम के घंटे निर्धारित किए जाने के लिए किए गए प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें भारी पैमाने पर सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने बताया कि श्रमिकों के वेतन वृद्धि का फैसला सरकार की उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा लिया गया, जिसे कल देर रात उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी। इस फैसले के अनुसार अब, गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों को 11,313 रुपये मासिक के स्थान पर 13,690 रुपये प्रति माह मिलेंगे जबकि अर्ध-कुशल श्रमिकों को अब 15,059 और कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये मिलेंगे। इसके अलावा, नगर निगम के अधीन अन्य क्षेत्रों में, संशोधित मासिक वेतन अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये निर्धारित किया गया है। राज्य के शेष जिलों में अकुशल श्रमिकों को एक अप्रैल से 12,356 रुपये प्रति माह, अर्ध-कुशल श्रमिकों को 13,591 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये प्रति माह मिलेंगे।
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने फैक्ट्री मालिकों और श्रमिक संगठनों के साथ बातचीत के बाद उपरोक्त फैसला लेते हुए दोनों पक्षों द्वारा उठाई गई व्यावहारिक आपत्तियों और परिणामों पर भी विचार किया गया। हालांकि न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का फैसला लेते हुए प्रदर्शनकारी श्रमिकों की उस मांग पर चुप्पी साध ली गई है जिसमें श्रमिकों ने काम के घंटे तय करने की मांग भी की थी। फिलहाल सरकार ने दोनों पक्षों के बीच संबंध सुधारने के उद्देश्य से श्रमिकों और नियोक्ताओं से बातचीत जारी रखने के लिए एक समिति का भी गठन कर दिया है।
नोएडा में हिंसा के बाद यूपी सरकार ने बढ़ाई न्यूनतम मजदूरी
