नहीं मिला दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन, सरकार बाकी दो बिलों पर वोटिंग से पीछे हटी
नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को अपने 11 साल के कार्यकाल के दौरान संसद में गुरुवार को बड़ा झटका लगा जब वह महिला आरक्षण विधेयक को नियमानुसार दो-तिहाई मतों से पारित नहीं करा सकी और यह विधेयक 54 वोट से गिर गया। इसके तुरंत बाद सरकार ने बाकी 2 बिल- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 पर सरकार ने वोटिंग कराने से इनकार कर दिया।
संसद में महिला आरक्षण बिल से जुड़े संविधान के 3 संशोधन बिलों पर लोकसभा में 21 घंटे की चर्चा के बाद गुरुवार को सबसे पहले संविधान संशोधन बिल पर वोटिंग हुई। इस बिल के जरिए, संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 के तहत लोकसभा की 850 सीटें करने का प्रावधान किया जाना था। इसके बिल के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े। लोकसभा में 528 सांसदों ने वोट डाले और नियमानुसार बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी। सरकार को बिल पास कराने के लिए 528 के दो-तिहाई यानी 352 वोट चाहिए थे लेकिन उसे केवल 298 वोट ही मिले।
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में अपनी एक घंटा स्पीच के दौरान कहा था कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।
इधर, पंजाब भाजपा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने एक्स पर लिखा- “विपक्षी पार्टियों की सोच दशकों बाद भी ‘महिला विरोधी’। आज लोकसभा में जो कुछ हुआ, वह लोकतंत्र और नारी सशक्तिकरण दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। नारी शक्ति वंदन बिल, जिसका उद्देश्य महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देकर उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान भागीदारी देना था, उसे कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी द्वारा रोकना हैरान करने वाला है। इस तरह के महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीति करना और उसकी विफलता पर खुशी मनाना अत्यंत निंदनीय है। यह केवल एक बिल का विरोध नहीं है, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं के अधिकारों और उम्मीदों के साथ खिलवाड़ है। वर्षों से लंबित इस अधिकार को फिर टालना यह दर्शाता है कि कुछ पार्टियों की सोच अभी भी नारी सशक्तिकरण के खिलाफ है। आज की महिलाएं इस खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं करेंगी। नारी सम्मान को रोकने वाली ताकतों को जनता की ओर से करारा जवाब जरूर मिलेगा।”
