चंडीगढ़ तमिल संगम ने 23 साल बाद मां-बेटे का कराया पुनर्मिलन
फ़र्ज़ सेवा सोसाइटी पटियाला ने युवक को किया पुनर्वास, उपचार
चंडीगढ़। तमिलनाडू में परिजनों से किसी बात पर नाराज होकर 23 वर्ष पहले भागा किशोर किसी तरह अमृतसर पहुंच गया, लेकिन यहां एक परिवार ने उसे बंधक बना लिया। उसे भैसों के तबेले में जंजीरों से बाँध कर रखा जाता और बंधुआ मजदूरी कराई जाती रही। बंधक बने युवक का एक वीडियो वायरल होने पर सामाजिक संस्थाएं, प्रशासन और मीडिया हरकत में आया। दोषी परिवार पर कार्यवाही हुई और युवक को मुक्त करवा कर उसके परिजनों को ढूंढ़ने का अभियान चलाया गया।
चंडीगढ़ तमिल संगम के प्रयासों से आखिरकार युवक के परिवार को ढूंढनें में सफलता मिली और बुधवार को, 23 वर्षों के बाद एक माँ को उसका खोया हुआ बेटा मिल गया। तमिल संगम द्वारा आयोजित एक विशेष समारोह में, युवक जिसका नाम प्रकाशम है, को उनकी माता सुंदरी, छोटे भाई प्रभु और परिवार के अन्य सदस्यों से मिला दिया गया।
समारोह के दौरान माँ-बेटे के मिलन का दृश्य बेहद भावुक रहा। वर्षों तक बेटे के लौटने की आस लगाए बैठी प्रकाशम की मांग सुंदरी अपने आँसू नहीं रोक सकीं। उन्होंने कहा कि पिछले 23 वर्षों में ऐसा कोई दिन नहीं बीता जब उन्होंने अपने बेटे को याद कर आँसू न बहाए हों। उन्हें विश्वास हो गया था कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन 23 वर्षों बाद उसकी आवाज़ दोबारा सुनना किसी चमत्कार से कम नहीं था। प्रकाशम वर्ष 2003 में पारिवारिक मतभेद के चलते किशोरावस्था में कोयम्बटूर स्थित अपना घर छोड़कर चला गया। समय के साथ परिवार से उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया और वे अमृतसर पहुंच गया, जहाँ उसे लंबे समय तक शोषण झेलना पड़ा। वर्ष 2022 में अपना फ़र्ज़ सेवा सोसाइटी पटियाला ने उसे संरक्षण दिया तथा चिकित्सा, पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराया। प्रकाशम की शारीरिक व मानसिक स्थिति के कारण उसके परिवार का पता लगाना बहुत मुश्किल काम था। इस मानवीय मिशन को सफल बनाने में हरियाणा विधानसभा के पूर्व सचिव सुभाष चंदर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद पत्रकार मुथैया ने तीन वर्षों तक लगातार प्रयास कर कोयम्बटूर में उसके परिवार का पता लगाया। इस पुनर्मिलन को संभव बनाने में पंजाब और तमिलनाडु के जिला प्रशासन तथा विभिन्न सरकारी अधिकारियों का भी उल्लेखनीय सहयोग रहा।
यह पुनर्मिलन अरविंद कुमार (आईएएस) निदेशक उच्च शिक्षा विभाग पंजाब, उपायुक्त पटियाला, उपायुक्त कोयम्बटूर, उपायुक्त विरुधुनगर, अपना फ़र्ज़ सेवा सोसाइटी, सुभाष चंदर, पत्रकार मुथैया और अनेक स्वयंसेवकों व समाजसेवियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम रहा।
इस अवसर पर चंडीगढ़ तमिल संगम के महासचिव एस. पी. राजशेखरन ने कहा कि यह केवल एक परिवार का पुनर्मिलन नहीं, बल्कि निराशा पर मानवता, हताशा पर आशा और उदासीनता पर करुणा की जीत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब सरकार, स्वयंसेवी संस्थाएँ, मीडिया और संवेदनशील नागरिक मिलकर कार्य करते हैं, तब दशकों से बिछड़े परिवारों का भी पुनर्मिलन संभव हो जाता है। उन्होंने इस मानवीय अभियान में सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों और संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
