तलवंडी साबो / चंडीगढ़। बैसाखी के मौके पर तख्त श्री दमदमा साहिब में नतमस्तक होने पहुंचे जाने-माने वकील और हाल ही में पंजाब भाजपा के सीनियर नेताओं में शामिल हुए एचएस फूल्का ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए खालसा सृजन दिवस की शुभकामनाएं दीं और गुरु साहिबान का धन्यवाद करते हुए अरदास की कि पंजाब को पुनः उसकी पुरानी शान और ऊंचाइयों पर पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि 1699 में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना ने न केवल देश को बाहरी आक्रमणकारियों से बचाया, बल्कि सिख कौम को साहस, शक्ति और आत्मगौरव से भर दिया।
फूल्का ने कहा कि तख्त श्री दमदमा साहिब के साथ उनका विशेष आध्यात्मिक और व्यक्तिगत संबंध है और वे अपने राजनीतिक जीवन के नए दौर की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस यहां कर रहे हैं, जो उनके लिए गर्व की बात है। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए फूल्का ने बेअदबी मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई केस पंजाब से बाहर ट्रांसफर हो रहे हैं और पंजाब सरकार उन फैसलों को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दे रही, जिससे सरकार की नीयत पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने जोर दिया कि यह मामला केवल सिख समुदाय ही नहीं, बल्कि सभी पंजाबियों की भावनाओं से जुड़ा है और इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
फूल्का ने अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने 1984 के सिख नरसंहार के मामलों में न्याय के लिए अपना पद छोड़कर भी लड़ाई जारी रखी, जिसका परिणाम सज्जन कुमार जैसे दोषियों को सजा मिलने के रूप में सामने आया। उन्होंने कहा कि यह सफलता वाहेगुरु की कृपा से संभव हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकारों ने दोषियों को सजा देने के बजाय उन्हें ऊंचे पदों पर बैठाया और 1984 का नरसंहार “कांग्रेस बनाम सिख” था, न कि किसी धर्म के खिलाफ। फूल्का ने कहा कि पंजाब की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है, खासकर पानी की कमी और कृषि से जुड़ी समस्याओं को लेकर। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले वर्षों में जल संकट गंभीर रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि वे दोबारा राजनीति में इसलिए आए हैं ताकि पंजाब को फिर से विकास और खुशहाली के रास्ते पर लाया जा सके और इसके लिए वे पूरी निष्ठा से कार्य करेंगे।
पंजाब सरकार बेअदबी मामलों पर गंभीर नहीं, सुप्रीम कोर्ट में भी नहीं लड़ रही केस : फूल्का
