बंदरों और हाथियों को खिलाए जा रहे ताजे तरबूज
मांसाहारी जानवरों को पिलाया जा रहा ग्लूकोन-डी
शाकाहारी जानवरों व पक्षियों के लिए पालक व खीरे
चंडीगढ़। भीषण गर्मी का असर जानवरों, पशु-पक्षियों पर भी दिखाई देने लगा है। छत्तबीड़ स्थित महेंद्र चौधरी जूलॉजिकल पार्क (छत्तबीड़ जू) के प्रशासन ने बढ़ते तापमान के बीच अपने जानवरों के स्वास्थ्य और सुविधा के लिए व्यापक आहार योजना लागू की है। पंजाब के वन एवं वन्यजीव संरक्षण मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए चिड़ियाघर में प्रत्येक भालू को प्रतिदिन 100 किलोग्राम आइस क्यूब उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। हाइड्रेशन और ठंडक बनाए रखने के लिए भालुओं के साथ-साथ बंदरों और हाथियों को ताजे तरबूज भी दिए जा रहे हैं। गर्म मौसम में तरल और इलेक्ट्रोलाइट की कमी को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा स्तर बनाए रखने और डिहाइड्रेशन रोकने के लिए सभी मांसाहारी और सर्वाहारी जानवरों के पीने के पानी में ग्लूकोन-डी पाउडर मिलाया जा रहा है।
चिड़ियाघर प्रशासन द्वारा फलों और सब्जियों के सेवन में भी मौसमी बदलाव किए गए हैं। केले की जगह पपीते का उपयोग किया जा रहा है क्योंकि पपीता पचाने में आसान होता है और उसमें पानी की मात्रा अधिक होती है। शाकाहारी जानवरों और पक्षियों के लिए पत्ता गोभी की जगह पालक के पत्तों का उपयोग किया जा रहा है तथा मूली की जगह खीरे दिए जा रहे हैं, जो बेहतर हाइड्रेशन और ठंडक प्रदान करते हैं। ये सभी उपाय छत्तबीड़ चिड़ियाघर की गर्मियों संबंधी नियमित तैयारियों और प्रोटोकॉल का हिस्सा हैं, जिनकी निगरानी पशु चिकित्सकों और पशु देखभाल स्टाफ द्वारा की जा रही है।
