हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने पंजाब के राज्यपाल से भेंट कर ज्ञापन सौंपा
राज्यपाल से पंजाब के हज कोटे को 300 से बढ़ाकर 1000 करने का आग्रह
चंडीगढ़। प्रमुख इस्लामिक स्कॉलर, ‘सर सैयद माइनॉरिटी फाउंडेशन ऑफ इंडिया – मॉडर्नाइजेशन ऑफ मदरसा एजुकेशन ऑफ इंडिया’ के चेयरमैन व राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आरक्षण मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने मंगलवार को पंजाब लोक भवन में प्रदेश के राज्यपाल व यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक से शिष्टाचार भेंट की और उन्हें मदरसा शिक्षा के आधुनिकीकरण व मुस्लिम समुदाय से जुड़े विभिन्न जनहित विषयों से संबंधित एक ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आरक्षण मोर्चा गुज्जर विभाग के चेयरमैन फ़िरोज़दीन, सुल्ताना रूही फातमा और शब्बीर आलम भी मौजूद थे।
मुलाकात के दौरान हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने राज्यपाल को अवगत कराया कि “स्कीम फॉर प्रोवाइडिंग क्वालिटी एजुकेशन इन मदरसाज़ (SPQEM)” भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य मदरसों में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना है। वर्तमान में इस योजना का संचालन भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सर सैयद माइनॉरिटी फाउंडेशन ऑफ इंडिया – मॉडर्नाइजेशन ऑफ मदरसा एजुकेशन ऑफ इंडिया बीते कई वर्षों से सरकार की इस योजना के प्रचार-प्रसार एवं प्रभावी क्रियान्वयन का काम कर रही है। फाउंडेशन द्वारा देश के 24 राज्यों में मदरसा शिक्षा के आधुनिकीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए, पंजाब मदरसा परिषद (Punjab Madarsa Council) गठित करने का आग्रह किया, जिसके तहत पंजाब से सभी मदरसों के पंजीकरण व प्रमाणीकरण की व्यवस्था हो। उन्होंने चंडीगढ़ संघ राज्य क्षेत्र के सभी निजी मदरसों के पंजीकरण एवं प्रमाणीकरण (Certification) की व्यवस्था का भी आग्रह किया, ताकि वे भारत सरकार एवं चंडीगढ़ प्रशासन की शिक्षा एवं अल्पसंख्यक कल्याण संबंधी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें और मदरसा शिक्षा के आधुनिकीकरण को गति मिल सके।
उन्होंने पंजाब के हज कोटे को वर्तमान लगभग 300 से बढ़ाकर 1000 करने का भी आग्रह किया। इसके अलावा मुस्लिम गुज्जर समुदाय के लिए कब्रिस्तान हेतु उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराने की मांग भी की। साथ ही साथ, हाजी मोहम्मद परवेज़ सिद्दीकी ने पंजाब वक्फ बोर्ड के कार्यों एवं भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग भी उठाई।
