AI के दौर में भी कानून की सबसे बड़ी ताकत होगी इंसानी सोच और नैतिकता : NMIMS में विशेषज्ञों का छात्रों को संदेश

चंडीगढ़। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से कानूनी पेशे की कार्यप्रणाली को बदल रहा है, लेकिन न्याय व्यवस्था की वास्तविक शक्ति हमेशा इंसानी विवेक, नैतिकता और संवेदनशीलता ही रहेगी। एसवीकेएम के एनएमआईएमएस चंडीगढ़ के स्कूल ऑफ लॉ में आयोजित स्वागत कार्यक्रम के दौरान देश के प्रमुख विधि विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने नए विद्यार्थियों को यही संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य के कानून विशेषज्ञों को AI को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी के रूप में अपनाना चाहिए और उन मानवीय गुणों को विकसित करना चाहिए जिन्हें कोई तकनीक कभी प्रतिस्थापित नहीं कर सकती।

बीए एलएलबी (ऑनर्स) और बीबीए एलएलबी (ऑनर्स) 2026-31 बैच के विद्यार्थियों के स्वागत के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों और उनके अभिभावकों के साथ न्याय व्यवस्था एवं विधि शिक्षा से जुड़े कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान बदलती तकनीक और AI के प्रभाव पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आने वाले समय में सफल वकील वही होंगे जो कानूनी ज्ञान के साथ-साथ तार्किक सोच, नैतिक निर्णय क्षमता, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और प्रभावी संवाद कौशल भी विकसित करेंगे।

कार्यक्रम में एनएमआईएमएस चंडीगढ़ की कैंपस डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) ज्योत्सना सिंह, हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीति सक्सेना, नेशनल ज्यूडिशियल अकादमी के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रो. (डॉ.) बलराम के. गुप्ता, स्कूल ऑफ लॉ के एसोसिएट डीन डॉ. नंदन शर्मा, प्रोग्राम चेयरपर्सन डॉ. तनमीत कौर साहिवाल तथा डिप्टी रजिस्ट्रार अभिनव कौशिक उपस्थित रहे।

प्रो. (डॉ.) ज्योत्सना सिंह ने कहा कि AI कॉन्ट्रैक्ट ड्राफ्टिंग, कानूनी शोध और केस विश्लेषण जैसे कार्यों को तेज और सरल बना सकता है, लेकिन न्याय, करुणा, नैतिकता और मानवीय संवेदनाओं का स्थान कभी नहीं ले सकता। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक के साथ कदम मिलाने के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व, मूल्यों और निर्णय क्षमता को भी मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भविष्य के कानूनी पेशेवरों की सबसे बड़ी पहचान उनकी आलोचनात्मक सोच, ईमानदारी और कानून को मानवीय दृष्टिकोण से लागू करने की क्षमता होगी।

वक्ताओं ने छात्रों को सलाह दी कि वे केवल कक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि मूट कोर्ट, इंटर्नशिप, लीगल एड क्लिनिक, शोध परियोजनाओं और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं जैसी व्यावहारिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करें। उनके अनुसार वास्तविक अनुभव और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ही उन्हें प्रतिस्पर्धी दौर में आगे ले जाएगी।

अपने प्रेरक संबोधन में प्रो. (डॉ.) बलराम के. गुप्ता ने कहा कि कानून का पेशा धैर्य, अनुशासन, सकारात्मक सोच और निरंतर सीखने की मांग करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रभावी संवाद कौशल विकसित करने और हर चुनौती को सीखने के अवसर के रूप में स्वीकार करने का आग्रह किया। वहीं, PatentsKart के मैनेजिंग डायरेक्टर भास्कर शर्मा ने कानून, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) और स्टार्टअप्स से जुड़े नए करियर अवसरों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को उभरते क्षेत्रों के लिए स्वयं को तैयार करने की सलाह दी। कार्यक्रम का समापन स्कूल ऑफ लॉ की प्रोग्राम चेयरपर्सन डॉ. तनमीत कौर साहिवाल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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