जमीन मालिकों को दरियाओं, चोओं, सेम नालों से गाद निकालने की अनुमति

पंजाब कैबिनेट ने निकाली गई सामग्री के मुफ्त इस्तेमाल की भी छूट दी
मोहाली समेत छह जिलों में आरक्षण सूची में बदलाव को मिली मंजूरी

चंडीगढ़। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब मंत्रीमंडल ने वीरवार को जमीन मालिकों को अपनी लागत पर सतलुज, ब्यास, सिसवां समेत सभी दरियाओं, चोओं और नालों से गाद निकालने और निकाली गई सामग्री का मुफ्त इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी। इसका उद्देश्य मॉनसून से पहले बाढ़ से निपटने की तैयारियों में तेजी लाना और महत्वपूर्ण हिस्सों में दरियाओं के प्रवाह को बेहतर बनाना है। यह जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा दी गई। कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर विचार के दौरान कहा गया कि महत्वपूर्ण जगहों पर तेजी से गाद हटाने, दरियाओं/चोओं के प्रवाह की क्षमता बढ़ाने और बाढ़ के जोखिम को कम किया जा सकेगा।
पंजाब सरकार ने 9 महत्वपूर्ण जगहों की पहचान की है, जहां आगामी मॉनसून सीजन को देखते हुए पानी के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए गाद निकालने की जरूरत है।
कैबिनेट ने एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में मंत्रीमंडल ने ग्राम पंचायतों के सरपंचों और पंचायत समितियों के चेयरमैन तथा वाइस चेयरमैन के लिए पंजाब आरक्षण के नियम-6 और जिला परिषदों के नियम-1994 में संशोधन को भी मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य विभिन्न श्रेणियों में प्रतिनिधित्व को तर्कसंगत बनाना है। इस कदम का उद्देश्य अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जाति की महिलाओं, महिलाओं और जनरल श्रेणी के आरक्षण के लिए हर श्रेणी में प्रतिनिधित्व को उचित बनाना है। इसमें कहा गया है कि यदि राज्य में जिला परिषदों की कुल संख्या का 10 प्रतिशत या इससे अधिक प्रभावित होता है तो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जाति की महिलाएं, महिलाएं और जनरल श्रेणियों के रोटेशन के लिए रोस्टर नए सिरे से तैयार किया जाएगा।
कैबिनेट की बैठक के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि मोहाली, पटियाला, फाजिल्का, फिरोजपुर, मलेरकोटला और संगरूर सहित छह जिलों की प्रशासनिक सीमाओं में हाल ही में हुए परिवर्तनों के मद्देनजर आरक्षण सूची में बदलाव को मंजूरी दे दी गई है। इस कदम का उद्देश्य अधिकार क्षेत्र में समायोजन के बाद स्थानीय निकायों में आरक्षण नीतियों का उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भी किसी जिले, तहसील या ब्लॉक की सीमाओं में 10 प्रतिशत से अधिक का परिवर्तन होता है, तो आरक्षण सूची को तदनुसार संशोधित किया जा सकता है। चीमा ने आगे कहा कि अपडेटेड रोस्टर जिला परिषद सदस्यों और पंचायत समिति अध्यक्षों पर लागू होगा, जिससे आरक्षण और रोटेशन के मानदंडों को फिर से परिभाषित करना आवश्यक हो जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई आपत्ति हो तो उसे 10 दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जा सकता है।

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