नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने कुछ समय के लिए प्रतीकात्मक वॉकआउट किया। विपक्ष ने बैठक में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उस बागी गुट की मौजूदगी का विरोध किया, जिसने हाल ही में दावा किया है कि उसके 20 सांसद त्रिपुरा स्थित नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए हैं। हालांकि विरोध दर्ज कराने के कुछ मिनट बाद विपक्षी नेता दोबारा बैठक में लौट आए और चर्चा में हिस्सा लिया।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि 20 सांसदों के एनसीपीआई में विलय को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि लोकसभा के टेबल ऑफिस के रिकॉर्ड के अनुसार टीएमसी के सांसदों की संख्या अब भी 28 है। ऐसे में बागी सांसदों को अलग दल के रूप में सर्वदलीय बैठक में बुलाना उचित नहीं था।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि यह वॉकआउट मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध था। उनका कहना था कि जब तक लोकसभा अध्यक्ष कथित विलय पर अंतिम निर्णय नहीं लेते, तब तक एनसीपीआई को बैठक में आमंत्रित करना उचित नहीं माना जा सकता।
केंद्र सरकार ने यह बैठक मानसून सत्र के विधायी एजेंडे और विभिन्न दलों से संवाद के उद्देश्य से बुलाई थी। विपक्ष ने संकेत दिया कि वह संसद सत्र के दौरान कथित श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट दान घोटाला, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, परिसीमन और लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगा। सरकार की ओर से सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की संभावना है।
