चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाने का फ़ैसला किया है, जिसमें कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) को राज्य में सरकारी तबादलों, पोस्टिंग, टेंडर और दूसरे प्रशासनिक मामलों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया है।
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सोमवार को चंडीगढ़ में राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद इस फ़ैसले की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार हाई कोर्ट के निर्देश को चुनौती देगी और सीबीआई जांच का विरोध करेगी। चीमा ने बताया कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय पंजाब ने सीबीआई जांच के लिए अपनी आम सहमति वापस ले ली थी और कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते समय राज्य इसी बात पर कायम रहेगा।
गौरतलब है कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को आदेश दिया कि वह सरकारी तबादलों और पोस्टिंग में कथित वित्तीय लेन-देन के आरोपों, और राज्य प्रशासन के कामकाज से जुड़ी अन्य संदिग्ध अनियमितताओं की जांच अपने हाथ में ले। चीफ़ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने कहा कि कोर्ट के सामने पेश किए गए सबूतों के आधार पर मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच ज़रूरी है। अदालत ने पंजाब पुलिस की अब तक की कार्रवाई पर असंतोष जताया और सीबीआई को मामला दर्ज कर जांच शुरू करने का निर्देश दिया। एजेंसी से कहा गया है कि वह दो महीने के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपे। इस मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी। अदालत ने पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस को भी निर्देश दिया कि वे जांच के दौरान सीबीआई को हर ज़रूरी मदद और सहयोग दें।
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सोमवार को चंडीगढ़ में राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद इस फ़ैसले की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार हाई कोर्ट के निर्देश को चुनौती देगी और सीबीआई जांच का विरोध करेगी। चीमा ने बताया कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय पंजाब ने सीबीआई जांच के लिए अपनी आम सहमति वापस ले ली थी और कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते समय राज्य इसी बात पर कायम रहेगा।
गौरतलब है कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को आदेश दिया कि वह सरकारी तबादलों और पोस्टिंग में कथित वित्तीय लेन-देन के आरोपों, और राज्य प्रशासन के कामकाज से जुड़ी अन्य संदिग्ध अनियमितताओं की जांच अपने हाथ में ले। चीफ़ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने कहा कि कोर्ट के सामने पेश किए गए सबूतों के आधार पर मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच ज़रूरी है। अदालत ने पंजाब पुलिस की अब तक की कार्रवाई पर असंतोष जताया और सीबीआई को मामला दर्ज कर जांच शुरू करने का निर्देश दिया। एजेंसी से कहा गया है कि वह दो महीने के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपे। इस मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी। अदालत ने पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस को भी निर्देश दिया कि वे जांच के दौरान सीबीआई को हर ज़रूरी मदद और सहयोग दें।
