बोर्ड में सरकार द्वारा नामित मैंबर नियुक्त करने का नया मसौदा कानून वापिस लेने का किया आग्रह
चंडीगढ़। शिरोमणी अकाली दल की वरिष्ठ नेता व बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देंवेंद्र फडणवीस से तख्त श्री हजूर साहिब बोर्ड के स्वायत्त स्वरूप को बरकरार रखने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें सिख समुदाय की भावनाओं के खिलाफ बोर्ड को सरकार द्वारा नामित मैंबरों को भरने वाले मसौदा कानून को वापिस लेना चाहिए।
मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में बठिंडा सांसद ने कहा कि सिख समुदाय इस बात से नाराज है कि सिख समुदाय, शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) या हजूरी सचखंड दीवान की भावनाओं को ध्यान में रखे बिना राज्य द्वारा नियुक्त कमेटी की सिफारिशों पर तख्त बोर्ड के स्वरूप में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि सिख संगठनों से कोई सलाह-मशवरा नहीं किया गया, इसीलिए यह धारणा बन रही है कि यह कदम बोर्ड की स्वायत्ता को खत्म करने की कोशिश है। बादल ने मुख्यमंत्री से कहा,‘‘ दुनिया भर से सिख इसे समुदाय को नुकसान पहुंचाने के लिए पवित्र स्थान को पूरा नियंत्रण लेने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। हरसिमरत बादल ने कहा कि समुदाय में इस बात पर आम सहमति है कि तख्त श्री हजूर साहिब की ‘मर्यादा ’(आचार संहिता), प्रबंधन और धार्मिक स्वायत्ता को प्रभावित करने वाला कोई भी फैसला एकतरफा नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे पहले फरवरी 2024 में महाराष्ट्र सरकार ने पवित्र स्थान को नियंत्रित करने वाले अधिनियम में संशोधन करते हुए बोर्ड के 17 में से 12 मैंबरों को सरकार द्वारा सीधे नामांकन के माध्यम से मनोनित करने की अनुमति दी थी। उन्होंने कहा,‘‘एसजीपीसी का प्रतिनिधित्व कम कर दिया गया था और मुख्य खालसा दीवान और हजूर सचखंड दीवान का प्रतिनिधित्व पूरी तरह से खत्म कर दिया था। हालांकि एसजीपीसी और स्थानीय सिख संगठनों के भारी विरोध के बाद इस संशोधन को वापिस ले लिया था, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने नए अधिनियम बोर्ड के ढ़ांचे में इसी तरह के बदलाव लाने का फैसला किया है।’’
बादल ने मुख्यमंत्री से सिख समुदाय को परंपरा के अनुसार अपने मामलों का प्रबंधन करने की अनुमति देने की अपील करते हुए कहा कि तख्त प्रबंधन ने पुराने अधिनियम को निरस्त करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले के खिलाफ एक ‘गुरुमाता’ (सामूहिक आदेश) भी जारी किया था। उन्होंने कहा,‘‘इसके अनुसार नए मसौदा कानून को वापिस लेकर पुराने अधिनियम को लागू रहने दिया जाना चाहिए। यह सिख समुदाय में बढ़ रहे तनाव को कम करने का काम करेगा क्योंकि समुदाय का मानना है कि महाराष्ट्र सरकार को उनके धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने से गुरेज करना चाहिए।’’ उन्होंने आगे कहा ,‘‘नया प्रस्तावित अधिनियम, जिसे राज्य विधानसभ के आगामी सत्र में मंजूरी के लिए पेश किया जाना जाना है, इस स्वायत्ता को छीनकर इसे पर सरकारी नियंत्रण स्थापित करना चाहता है। यह सिख समुदाय की भावनाओं के खिलाफ किया जा रहा है और इसकी समीक्षा की जानी चाहिए।’’
