चंडीगढ़। सांझा मुलाज़िम मंच पंजाब-चंडीगढ़ की ओर से कर्मचारियों की लंबित मांगों का समाधान न होने के कारण गुरुवार को पंजाब के राज्यपाल और यूटी के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से मिलकर उन्हें मांग पत्र सौंपा। मुलाजिम मंच की ओर से राज्यपाल से मिलने के लिए समय मांगा गया था। गुरुवार को राजभवन में सांझा मुजाजिम मंच के पदाधिकारियों की राज्यपाल के साथ करीब आधा घंटा बैठक हुई।
मंच की ओर से जारी प्रेस बयान के अनुसार, बैठक में राज्यपाल के प्रमुख सचिव विवेक प्रताप सिंह भी उपस्थित थे। बैठक में मुख्य रूप से पंजाब के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना लागू करने, 18 फीसदी महंगाई भत्ता और बकाया राशि का भुगतान करने, 17 जुलाई 2020 और 15 जनवरी 2015 के पत्रों को समाप्त करने, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने तथा पेंशनरों को 2.59 का फैक्टर लागू कर पेंशन देने जैसी मांगों पर चर्चा की गई। मुलाज़िम मंच के कन्वीनर सुखचैन सिंह खैहरा ने बताया कि कर्मचारियों की मांगें लंबे समय से लंबित पड़ी हैं, जिसके कारण कर्मचारियों में पंजाब सरकार के प्रति भारी रोष है। मंच की ओर से डीए संबंधी अदालत में चल रहे मामले के तथ्यों को भी राज्यपाल के ध्यान में लाया गया। उन्हें यह बताया गया कि अदालत में सरकारी वकील द्वारा डीए और बकाया राशि पर लगभग पंद्रह हजार करोड़ रुपये का खर्च बताया गया, जबकि सरकार द्वारा मुफ्त योजनाओं पर लगभग बीस से बाईस हजार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
राज्यपाल ने मुलाजिम मंच के पदाधिकारियों की बातें सुनने के बाद आश्वासन दिया कि जून के पहले सप्ताह में पंजाब के मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के साथ कर्मचारियों की मांगों को लेकर बैठक की जाएगी और इस मामले का बातचीत के माध्यम से जल्द से जल्द समाधान किया जाएगा। इस बैठक में मनजीत सिंह रंधावा, सुशील कुमार फौजी, साहिल शर्मा, अमित कटौच और हरनेक सिंह भी उपस्थित थे।
कर्मचारियों की मांगों को लेकर सांझा मुलाजिम मंच राज्यपाल से मिला
