श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी हुई तो जाना होगा 7 से 20 साल तक जेल

पंजाब सरकार के ऐतिहासिक ‘बेअदबी बिल’ को राज्यपाल ने दी मंजूरी

चंडीगढ़। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने आधिकारिक तौर पर ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम,2026’ को अपनी मंज़ूरी दे दी है। इसके साथ ही, पंजाब विधानसभा द्वारा पारित यह अधिनियम अब आधिकारिक तौर पर कानून बन गया है। इसके जरिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब से संबंधित अपवित्रता के कृत्यों (बेअदबी) को रोकने और दोषियों को दंडित करने के लिए एक सख्त ढांचा तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पवित्र ग्रंथ की गरिमा, संरक्षण और उचित देखरेख सुनिश्चित करना है, साथ ही साथ कड़े कानूनी निवारक उपाय पेश करना है। यह कानून सुनिश्चित करता है कि पवित्र ग्रंथ का प्रयोग सिख धार्मिक मानदंडों (रहत मर्यादा) के अनुसार ही किया जाए और ऐसे कृत्यों को हतोत्साहित करने के लिए इसमें कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षरित फाइल की एक प्रति साझा करके इस कानून के पारित होने की पुष्टि की। उन्होंने एक्स पर लिखा- श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के खिलाफ विधानसभा में पास किए गए बिल पर माननीय राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया जी ने दस्तखत कर दिए हैं.. अब यह बिल कानून बन गया है.. मेरे जैसे मामूली व्यक्ति से यह सेवा लेने के लिए वाहेगुरु जी का कोटि-कोटि धन्यवाद.. सारी संगत का शुक्रिया..

विधानसभा में पारित बिल जो अब कानून बन गया है, में शामिल प्रावधान इस प्रकार हैं-

• इस कानून में “बीड़/बीड़ों” शब्दों को “सरूप/सरूपों” से बदल दिया गया है, जिसे श्री गुरु ग्रंथ साहिब को संबोधित करने का अधिक सम्मानजनक तरीका माना जाता है।
• केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) या उसके अधिकृत निकाय ही स्वरूपों को छाप सकते हैं, प्रकाशित कर सकते हैं, संग्रहित कर सकते हैं, वितरित कर सकते हैं या आपूर्ति कर सकते हैं। इस कदम का उद्देश्य श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अनधिकृत उपयोग या दुरुपयोग को रोकना है।
• इस अधिनियम में अपवित्रता को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसमें जलाना, फाड़ना, विकृत करना या चोरी करना जैसी शारीरिक क्षति शामिल है। इसमें जानबूझकर सिखों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कोई भी मौखिक, लिखित, डिजिटल या प्रतीकात्मक कार्य भी शामिल है।
• एक प्रमुख सुधार केंद्रीय ट्रैकिंग प्रणाली की स्थापना के रूप में भी किया गया है। प्रत्येक स्वरूप की एक विशिष्ट आईडी होगी, और इसके मुद्रण, भंडारण और संरक्षक से संबंधित विवरण दर्ज किए जाएंगे। यह डाटा नियमित रूप से अपडेट किया जाएगा और ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
• किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह व्यक्ति हो, संस्था हो या गुरुद्वारा हो, जिसे भी स्वरूप की जिम्मेदारी सौंपी गई हो, उसे उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी, धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करना होगा और किसी भी प्रकार की क्षति, हानि या अपवित्रता के संदेह की सूचना तुरंत अधिकारियों को देनी होगी।
• इस कानून के तहत आने वाले मामलों की सुनवाई डीएसपी या एसीपी रैंक के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा की जाएगी। समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए जांच प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने की उम्मीद है।
• इस अधिनियम के अंतर्गत सभी अपराधों को अब संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौता योग्य के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसका मतलब है कि पुलिस तुरंत कार्रवाई कर सकती है, जमानत आसानी से नहीं मिलेगी और मामलों का निपटारा निजी तौर पर नहीं किया जा सकेगा। मुकदमे सत्र न्यायालयों में चलेंगे।

यह है सख्त सजा का प्रा‌वधान-
• सामान्य उल्लंघनों के लिए 5 वर्ष तक की कैद और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
• धर्म के अपमान के मामलों में जुर्माने के साथ-साथ 7 से 20 साल तक की कैद की सजा हो सकती है।
• शांति भंग करने की साजिश के लिए 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और भारी जुर्माना हो सकता है।
• धर्म के अपमान के कृत्यों का प्रयास करना या उनमें सहायता करना भी कारावास और दंड का कारण बन सकता है।

PDF File

Jaagat Jot Sri Guru Granth Sahib Satkar Bill 2026

 

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