पीयूसीए के कार्यक्रम में वित्त मंत्री का ऐलान, छात्रों को उच्च शिक्षा में वित्तीय बाधा नहीं आने देंगे
चंडीगढ़। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा है कि पंजाब के 3 लाख से अधिक अनुसूचित जाति (एससी) छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में अब वित्तीय बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।
चंडीगढ़ स्थित पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था – ‘कैंपस से कॉर्पोरेट जगत तक: वैश्विक वित्तीय नेताओं का निर्माण।’ कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए चीमा ने कहा कि पिछली सरकार 2017 से 2020 तक पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति की धनराशि वितरित करने में विफल रही, जिसके कारण हजारों छात्र अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाए और कई कॉलेज वित्तीय संकट में डूब गए। उन्होंने बताया कि भगवंत मान के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार ने लंबित देनदारियों के रूप में लगभग 432 करोड़ रुपये (कुल राशि का लगभग 40 फीसदी) की राशि को मंजूरी दे दी है। उन्होंने पंजाब के तकनीकी उच्च शिक्षा संस्थानों को पंजाब अनएडेड कॉलेज एसोसिएशन (पीयूसीए) से जोड़ने के लिए डॉ. अंशु कटारिया के प्रयासों की भी सराहना की। पीयूसीए के अध्यक्ष और राजपुरा स्थित आर्यन ग्रुप ऑफ कॉलेज के चेयरमैन डा. अंशु कटारिया इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। डॉ. कमल छाबरा और डॉ. मनप्रीत सिंह मन्ना, सेवानिवृत्त आईएएस एस. निर्मलजीत सिंह कालसी विशेष अतिथि थे। के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में एस. मनजीत सिंह, डॉ. गुरमीत सिंह धालीवाल, डॉ. ज़ोरा सिंह, एडवोकेट अमित शर्मा, डॉ. मोहित महाजन, एस. गुरप्रीत सिंह, एस. निर्मल सिंह रायत, हरप्रीत सिंह चन्नी और एडवोकेट विक्रम पासी ने भी हिस्सा लिया।
इस अवसर पर डॉ. अंशु कटारिया ने कहा कि पंजाब न केवल स्कूली शिक्षा में अग्रणी है, बल्कि भारत में तकनीकी शिक्षा के लिए भी एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में प्रगति कर रहा है। उन्होंने पंजाब को शिक्षा केंद्र के रूप में बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिहार, झारखंड, असम और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों के साथ-साथ नेपाल और अफ्रीका के विभिन्न क्षेत्रों में पीयूसीए की पहुंच संबंधी प्रयासों पर प्रकाश डाला। कटारिया ने बताया कि पीयूसीए लगभग 8,000 तकनीकी संस्थानों को एक मंच पर लाने की दिशा में काम कर रहा है ताकि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक लाखों छात्रों को लाभ मिल सके।
