ईटीटी अध्यापक यूनियन 24 से कैबिनेट मंत्रियों के गांवों में करेगी कर्मचारी सभाएं

चंडीगढ़। पुरानी पेंशन योजना की बहाली समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ईटीटी अध्यापक यूनियन पंजाब ने सोमवार को ‘करो या मरो’ संघर्ष का ऐलान कर दिया। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित राज्य स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जसविंदर सिंह सिद्धू ने अपनी टीम के साथ आगामी संघर्ष की रणनीति साझा की। उन्होंने बताया कि 6 से 10 मई तक पूरे पंजाब में जिला स्तर पर बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 24 मई से पुरानी पेंशन योजना लागू करने, कर्मचारियों का डीए जारी करने, जनगणना, बीएलओ और अन्य गैर-शैक्षणिक ड्यूटी समाप्त करने और कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग को लेकर कैबिनेट मंत्रियों के गांवों में कर्मचारी सभाएं आयोजित की जाएंगी। इन सभाओं की शुरुआत कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ के गांव से होगी और उसके बाद गुरमीत सिंह खुडियां, अमन अरोड़ा, हरपाल सिंह चीमा, संजीव अरोड़ा, महिंदर भगत और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के गांवों में सभाएं होंगी।
इन कार्यक्रमों में मंत्रियों के लिए मंच पर कुर्सी लगाई जाएगी और उनसे जनता के बीच अपने चुनावी वादों और पेंशन संबंधी घोषणाओं पर जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने बताया कि यूनियन के प्रतिनिधि एक सप्ताह पहले संबंधित मंत्रियों को औपचारिक निमंत्रण देंगे। यदि मंत्री या मुख्यमंत्री इन सभाओं में शामिल नहीं होते, तो पूरे पंजाब में जनसभाएं कर सरकार की नीतियों का खुलासा किया जाएगा। इसके बाद कर्मचारी और पेंशनर ‘नो वोट फॉर आप पार्टी’ के पोस्टर अपने घरों और गांवों में लगाकर विरोध जताएंगे। यूनियन ने कहा कि इस आंदोलन से ऐसा माहौल बनाया जाएगा कि भविष्य में आप नेताओं का गांवों और शहरों में जाना मुश्किल हो जाएगा। सिद्धू ने कहा कि यह पहली बार है कि किसी सरकार ने चुनाव से पहले पुरानी पेंशन बहाल करने का ऐलान, कैबिनेट में मंजूरी और नोटिफिकेशन जारी करने के बावजूद इसे लागू नहीं किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो पंजाब में बड़ा आंदोलन शुरू होगा। इस मौके पर यूनियन के वरिष्ठ नेता बलराज सिंह घलोटी, उंकार सिंह, प्रेस सचिव राजेश कुमार सहित विभिन्न जिलों के अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।

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