हरियाणा में धान खरीद में देरी पर हुड्डा ने सरकार को घेरा

बोले- कम रेट पर फसल बेचने को मजबूर हो रहे किसान, सरकार नहीं कर रही खरीद

चंडीगढ़। हरियाणा में खरीफ फसलों की सरकारी खरीद को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर हमला तेज कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आरोप लगाया कि मंडियों में धान की खरीद नहीं हो रही है। आवक 12 लाख मीट्रिक टन हो चुकी है, लेकिन सरकार ने अब तक मात्र 30 प्रतिशत ही खरीदा है। यानी 70 प्रतिशत किसान अब भी सरकारी खरीद का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो धान खरीदा भी गया है, उसका भी मात्र 17 प्रतिशत ही उठान हुआ है। मंडियों में अब नई फसल रखने की जगह तक नहीं बची है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा शनिवार को अपने आवास पर पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर वरिष्ठ नेता और थानेसर से विधायक अशोक अरोड़ा भी उनके साथ थे। अशोक अरोड़ा ने कहा कि किसानों के साथ ये सब इसलिए किया जा रहा है ताकि किसान कम रेट में अपनी फसल बेचें और प्राइवेट एजेंसियों को फायदा हो। हुड्डा ने कहा कि उन्होंने प्रदेश की कई मंडियों का दौरा किया। किसानों ने खुद बताया कि एमएसपी न मिलने की वजह से उन्हें 400 रुपये प्रति क्विंटल तक कम रेट पर धान और 800-900 रुपये प्रति क्विंटल कम रेट पर बाजरा बेचना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने चुनाव में ऐलान किया था कि सरकार 3100 रुपए क्विंटल के हिसाब से धान खरीदेगी। लेकिन सच्चाई ये है कि आज किसानों को 2441 रुपये एमएसपी भी नहीं मिल रही है। मूंग की एमएसपी 8780 रुपये है, लेकिन खरीद ना होने से किसानों को प्रति क्विंटल 1500 से 1600 रुपए तक घाटे की मार पड़ रही है। इसी तरह बाजरे के किसान भी 2900 रुपये प्रति क्विंटल की कागज़ी एमएसपी के बीच, अपनी उपज 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक में देने की मजबूरी के कारण करीब 900 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा झेल रहे हैं।
हुड्डा ने कहा कि भाजपा सरकार धान नहीं खरीदना चाहती और किसानों को कई झमेलों में उलझा रही है। पहले पोर्टल, फिर वेरिफिकेशन और उसके बाद गेटपास व कैपिंग और लिमिट। हालत यह है कि सिर्फ धान के वेरिफिकेशन में साढ़े चार लाख एकड़ का गैप पाया गया है। करीब 3 लाख एकड़ मोटे धान का सत्यापन, जबकि बासमती के 80000 एकड़, कपास का 1.71 लाख एकड़, बाजरे का 3.49 लाख एकड़ और गन्ने का 31,000 एकड़ का सत्यापन अभी पेंडिंग हैं।
किसानों के साथ भाजपा सरकार के खिलवाड़ की चर्चा करते हुए हुड्डा ने उकलाना अनाज मंडी का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि मंडी में एक किसान की फसल की नमी चेक की गई। वहां सरकारी एजेंसी के पास तीन मशीनें थीं, लेकिन एक ही धान के सैंपल की नमी तीनों मशीनों ने अलग-अलग बताई। यानी साफ है कि सरकार का इरादा किसानों की फसल न खरीदने और उन्हें एमएसपी से पूरी तरह वंचित करने का है।
हुड्डा ने याद दिलाया कि भाजपा ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन सच्चाई यह है कि उसने किसानों की लागत कई गुना बढ़ा दी। जब एमएसपी में बढ़ोतरी की बात आती है तो सरकार किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान 2005 से 2014 तक धान और गेहूं के एमएसपी में हर बार 14 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती थी, जबकि भाजपा सरकार के दौरान मात्र 5 से 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा रही है। उन्होंने मांग की कि भाजपा सरकार एमएसपी पर श्वेत पत्र भी जारी करे, ताकि जनता को पता चल सके कि कांग्रेस सरकार के दौरान कितनी बढ़ोत्तरी होती थी और भाजपा कितनी कर रही है।

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