11 सितंबर को बैंकों की देशव्यापी हड़ताल, मांगें न मानी तो 28-30 तक फिर हड़ताल

नई दिल्ली। देशभर के बैंक कर्मचारियों अधिकारियों के संगठन यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन्स (UFBU) ने 11 सितंबर को देशव्यापी बैंक हड़ताल का ऐलान किया है। इसके साथ ही फोरम में यह भी साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल की जाएगी। गौरतलब है कि फोरम की 11 सितंबर की हड़ताल के ऐलान से देशभर में बैंक पहले ही चार दिन बंद रहेंगे क्योंकि 12 सितंबर को शनिवार और 13 सितंबर को रविवार के अवकाश के बाद 14 सितंबर को कुछ राज्यों में गणेश चतुर्थी की छुट्टी रहेगी।
यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (UFBU), जो बैंकिंग सेक्टर के 90 प्रतिशत से ज़्यादा कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है, ने पांच दिन के बैंकिंग वीक और सरकार की बदली हुई परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम से जुड़े अनसुलझे मुद्दों को लेकर कई हड़तालों की घोषणा की है। UFBU ने 11 सितंबर को एक दिन की हड़ताल के बाद 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल और अगर मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो 26 अक्टूबर, 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है।
UFBU की विज्ञप्ति के अनुसार, इस फ़ोरम में सात यूनियनें – AIBEA, AIBOC, NCBE, AIBOA, BEFI, INBOC और INBEF – शामिल हैं और यह पब्लिक सेक्टर, प्राइवेट, विदेशी, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। फोरम के अनुसार, यूनियनों ने चार मुख्य मांगें रखी हैं: पांच दिन का बैंकिंग सप्ताह लागू रना, सरकार की ‘परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव’ स्कीम को वापस लेना, आपसी बातचीत के ज़रिए इंसेंटिव स्कीम में बदलाव करना और लंबित बचे हुए मुद्दों का समाधान करना।
फोरम का कहना है कि पांच दिन के बैंकिंग सप्ताह की मांग कई सालों से लंबित है। बैंक 2015 में पांच दिन के सप्ताह की ओर बढ़ने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गए थे, जब दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी घोषित की गई थी। इस मामले पर 2020 में फिर से विचार किया गया और बाद में 8 मार्च, 2024 को हुए वेतन समझौते के ज़रिए इसे औपचारिक रूप दिया गया। इस व्यवस्था के तहत, बैंक कर्मचारी सभी शनिवार को छुट्टी घोषित किए जाने के बदले सोमवार से शुक्रवार तक हर दिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करने पर सहमत हुए। फोरम की तरफ से कहा गया है कि इस समझौते की सिफारिश दो साल से भी पहले वित्त मंत्रालय से की गई थी, लेकिन इसे अभी भी सरकार की मंज़ूरी का इंतज़ार है।
परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम भी विवाद का एक और बड़ा मुद्दा है। फोरम का कहना है कि PLI स्कीम 2020 के एक समझौते के तहत शुरू की गई थी और यह हाउसकीपिंग स्टाफ से लेकर जनरल मैनेजर तक, सभी बैंक कर्मचारियों पर एक समान रूप से लागू होती थी। उस व्यवस्था के तहत, बैंक के प्रदर्शन के आधार पर इंसेंटिव एक दिन से लेकर अधिकतम 15 दिनों की सैलरी के बराबर होता था। नवंबर 2024 में फाइनेंशियल सर्विसेज़ डिपार्टमेंट ने बैंकों को निर्देश दिया कि वे स्केल IV से VII तक के अधिकारियों के लिए उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर एक नया इंसेंटिव फ़ॉर्मूला अपनाएं। यूनियनों का कहना है कि इसमें लगभग 40,000 अधिकारी शामिल हैं, जो इंडस्ट्री के कुल 8 लाख कर्मचारियों का लगभग 5 प्रतिशत है। यूनियनों के अनुसार, नए फ़ॉर्मूला के तहत सीनियर अधिकारियों को 365 दिनों की सैलरी तक का इंसेंटिव मिल सकता है, जबकि बाकी 95 प्रतिशत कर्मचारियों को ज़्यादा से ज़्यादा 15 दिनों की सैलरी के बराबर इंसेंटिव मिल सकता है।

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