असम के 27 लोगों को विदेशी ठहराने का हाईकोर्ट का फैसला रद

सुप्रीम कोर्ट ने फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल का फैसला भी खारिज किया
सभी मामलों की नए सिरे से सुनवाई का आदेश जारी
कहा- निष्पक्ष प्रक्रिया के बिना किसी को विदेशी नहीं ठहरा सकते

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि किसी भी व्यक्ति की नागरिकता या विदेशी होने की स्थिति का निर्धारण केवल निष्पक्ष, कानूनी और न्यायसंगत प्रक्रिया के माध्यम से ही किया जा सकता है। अदालत ने असम के 27 लोगों को विदेशी घोषित करने वाले फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के आदेशों और उन पर मुहर लगाने वाले गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसलों को रद्द करते हुए सभी मामलों को नए सिरे से सुनवाई के लिए संबंधित ट्रिब्यूनलों के पास भेज दिया।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि नागरिकता और विदेशी होने का प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक और कानूनी महत्व का विषय है। ऐसे मामलों में निर्णय पूरी निष्पक्षता और कानून के निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 9 के तहत भारतीय नागरिक होने का प्रमाण प्रस्तुत करने का दायित्व संबंधित व्यक्ति पर ही रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि सरकार का यह वैध और महत्वपूर्ण दायित्व है कि जो लोग भारतीय नागरिकता के पात्र नहीं हैं, वे झूठे दावों, दस्तावेजों या कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग के जरिए नागरिकता प्राप्त न कर सकें। हालांकि अदालत ने कहा कि इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया जा सकता।

पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने अपीलकर्ताओं के नागरिकता संबंधी दावों के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। दस्तावेजों की प्रामाणिकता, उनकी स्वीकार्यता और साक्ष्यों की पर्याप्तता का मूल्यांकन संबंधित फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल स्वतंत्र रूप से करेगा। अदालत ने यह भी कहा कि मामलों को दोबारा सुनवाई के लिए भेजने का अर्थ अपीलकर्ताओं को कोई विशेष राहत या अधिकार देना नहीं है। सभी मामलों का फैसला विदेशी अधिनियम, 1946, फॉरेनर्स (ट्रिब्यूनल) आदेश, 1964 तथा संविधान में निहित निष्पक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप स्वतंत्र रूप से किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मामलों को वापस भेजने का अर्थ अपीलकर्ताओं को किसी प्रकार की राहत या विशेष लाभ देना नहीं है। अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल सभी मामलों की नए सिरे से सुनवाई करे और पूर्व के आदेशों या गौहाटी हाईकोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र निर्णय दे।

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