इनेलो के प्रो. संपत सिंह ने एचईआरसी के समक्ष 112 मुद्दों के साथ दर्ज कराया विरोध
कांग्रेस की चुप्पी पर उठाए सवाल, कहा- एचईआरसी के समक्ष कोई नेता नहीं पहुंचा
चंडीगढ़। इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने वीरवार को पार्टी मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर गुरुग्राम और नूंह में बिजली
वितरण का काम निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को देने की हरियाणा सरकार की कोशिशों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह बिजली क्षेत्र में सुधार नहीं, बल्कि
जनता की संपत्ति, सरकारी ढांचे और सरकारी आय को निजी हाथों में सौंपने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि डीएचबीवीएन का 42 प्रतिशत रिवेन्यू गुरुग्राम जिले से आता है। गुरुग्राम जिले में बिजली का लाइन लॉस प्रदेश के मुकाबले आधा है। प्रदेश का लाइन लॉस 40.7 प्रतिशत, वही गुरुग्राम का लाइन लॉस 10.02 प्रतिशत है। गुरुग्राम में बिजली से पूरी आय हो रही है। इस मौके पर इनेलो के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष आरएस चौधरी, पूर्व डीजीपी एमएस मलिक, प्रदेश प्रवक्ता सतबीर सैनी और पार्टी कार्यालय सचिव नछत्तर सिंह मलहान भी मौजूद रहे।
प्रो. संपत सिंह ने कहा कि निजीकरण को लेकर बुधवार को हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HERC) में हुई सुनवाई के दौरान इनेलो ने 112 पॉइंट बनाकर गुरुग्राम में बिजली के निजीकरण का विरोध किया है और यह लड़ाई लंबी चलेगी। अड़ानी कंपनी ने भी लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। गुरुग्राम को लूटने के कई कारण है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत गुरुग्राम में 1608 करोड़ रुपए और आरडीएसएस सिटी योजना के तहत 3584 रुपए का निवेश किया गया है। इस जनता के धन के ऊपर सभी की नजर है। वर्तमान में सरकार एक नौ सीखिया कंपनी को गुरुग्राम का लाइसेंस देने की तैयारी कर रही है। इस कंपनी की स्थापना 6 जून 2025 को हुई थी। कंपनी की कुल पूंजी भी एक करोड़ रुपए है। कंपनी के पास ना तो कोई अनुभव है और ना ही कोई नेटवर्क है। लेकिन करीब 4717 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट उनको देने की तैयारी है। देश के संविधान का आर्टिकल 38 और 29 देश के संसाधनों को जनहित में उपयोग करने के लिए कहता है। सरकार आज एक तरफ तो बिजली कंपनियों का जो निजीकरण कर रही है। उसमें सरकार ने उदय योजना के तहत 25950 करोड़ रुपए जनता से वसूले हैं। सरकार ने 3,352 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी भी लगाई है। सरकार ने भी घाटे को पूरा करने के लिए सब्सिडी दी है।
संपत सिंह में कांग्रेस पर भी उठाए सवाल। खुद को प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी बता रही कांग्रेस का कोई भी नेता बिजली सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं हुआ जबकि कांग्रेस के सभी नेता चंडीगढ़ में बैठक में मौजूद थे।
