पीएम मोदी और अमित शाह वोटों की चोरी कर जीत रहे चुनाव : केजरीवाल

यह मांगें भी उठाईं-
ज्ञानेश कुमार गुप्ता को गिरफ्तार करके देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाए
गैरकानूनी एसआईआर प्रक्रिया रद्द कर तीन साल पुरानी वोटर लिस्ट बहाल हो
दिल्ली-बिहार समेत बीते सालों में हुए सारे चुनाव रद्द कर दोबारा कराया जाएं

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) की ओर से मोदी सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बार-बार लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों पर इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट ने मुहर लगा दी है। रिपोर्ट में हुए चौंकाने वाले खुलासे के बाद आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह वोटों की चोरी कर चुनाव जीतते जा रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस वोट चोरी के सरगना हैं। उन्होंने मांग की है कि ज्ञानेश कुमार को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की बिना मंजूरी चल रही एसआईआर प्रक्रिया गैर कानूनी है। इस प्रक्रिया को रद्द कर तीन साल पुरानी वोटर लिस्ट को बहाल किया जाए। साथ ही, दिल्ली, बिहार समेत पिछले कुछ सालें में हुए राज्य विधानसभा चुनावों को रद्द कर दोबारा कराया जाए।
बुधवार को आप मुख्यालय पर सांसद संजय सिंह और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के साथ प्रेस वार्ता कर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज इंडियन एक्सप्रेस की स्टोरी ने साबित कर दिया है कि असल में ये लोग चुनावों की चोरी कर रहे हैं। ये बहुत बड़ा वोटों का घोटाला करके चुनाव जीतते जा रहे हैं। मोदी जी और अमित शाह की इस वोटों की चोरी के सरगना ज्ञानेश कुमार हैं। केजरीवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि चुनाव आयोग एक व्यक्ति का नाम नहीं है, चुनाव आयोग का मतलब है तीन लोग। चुनाव आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो सदस्य होते हैं। तीनों मिलकर मीटिंग करते हैं और उस मीटिंग में सर्वसम्मति से या बहुमत से फैसले होते हैं। इन तीनों में से कोई अकेला व्यक्ति निर्णय लेने का अधिकार नहीं रखता। केजरीवाल ने कहा कि आज इंडियन एक्सप्रेस की स्टोरी यह कहती है कि ज्ञानेश कुमार पिछले कुछ सालों से अकेले चुनाव आयोग चला रहे हैं। दोनों चुनाव आयुक्तों ने बार-बार लिखित शिकायत दी है कि चुनाव आयोग के आदेश और अधिकार के बिना, नीचे के अफसरों को आदेश दिए जा रहे हैं। 28 अक्टूबर 2025 को और 16 अप्रैल 2026 को दो बार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने मुख्य चुनाव आयुक्त को चिट्ठी लिखी कि केंद्रीय चुनाव आयोग की मंजूरी के बिना भारत के चुनाव आयोग के नाम पर पत्र और आदेश जारी किए जा रहे हैं। तीसरे चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने भी 24 अप्रैल को लिखा कि केंद्रीय चुनाव आयोग की मंजूरी के बिना आधिकारिक पत्र जारी किए जा रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि पूरा एसआईआर प्रोसेस, जिसके जरिए 30 राज्यों के अंदर 13 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम डिलीट कर दिए गए, पूरे का पूरा गैर-कानूनी है क्योंकि उसको चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर अप्रूव नहीं किया है। उसके तहत पारित किए गए सारे आदेश गैर-कानूनी हैं। उन्होंने मांग की कि उस पूरे एसआईआर प्रोसेस को रद्द किया जाए।

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