अगले दो महीनों में 800 से अधिक सरकारी सेवाएं इस पोर्टल से जोड़ दी जाएंगी: अमन अरोड़ा
अब सरकार आएगी आपके पास, लोगों को कामों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे
चंडीगढ़। पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित शासन की ओर एक बड़ा कदम उठाते हुए पंजाब के सुशासन और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अमन अरोड़ा ने मंगलवार को ‘Digi.Punjab.gov.in’ पोर्टल लॉन्च किया। यह एक ऐसा एकीकृत डिजिटल पोर्टल है, जिस पर 12 विभागों की 300 से अधिक सरकारी सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध हैं, जिससे विभिन्न पोर्टलों पर जाने, दस्ती (मैन्युअल) फाइलें देने और सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।
यहां महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (मैगसीपा) में पोर्टल लॉन्च करने के बाद अमन अरोड़ा ने बताया कि पहले चरण के तहत नागरिक अब कई विभागों से संबंधित 300 से अधिक आवश्यक जनसेवाओं तक आसानी से पहुंच सकते हैं। मुख्य सेवाओं में स्वास्थ्य विभाग से संबंधित दस्तावेज जैसे जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र, गृह मामलों की सेवाएं जैसे शस्त्र लाइसेंस जारी करना और नवीनीकरण तथा विवाह पंजीकरण आदि शामिल हैं। इसके अलावा नागरिक श्रम कल्याण योजनाओं, स्थानीय निकायों की संपत्तियों के हस्तांतरण, मेडिकल शिक्षा पंजीकरण, पुलिस वैरीफिकेशन सेवाओं (जैसे किरायेदार और नौकर की जांच), राजस्व विभाग के प्रमाण पत्र (जैसे आय, निवास और पिछड़ा क्षेत्र के प्रमाण पत्र), सामाजिक न्याय विभाग के जाति प्रमाण पत्र, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, और पानी के कनेक्शन की स्वीकृति का लाभ उठा सकते हैं। यह पोर्टल, जिस पर अगले दो महीनों में सभी 800 से अधिक सरकारी सेवाएं उपलब्ध होंगी, प्रत्येक आवेदन के लिए एक समय-सीमा निर्धारित करता है। अमन अरोड़ा ने कहा, “ऊपर से लेकर नीचे तक प्रत्येक अधिकारी के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। किसी भी देरी का असर उनके रिकॉर्ड पर दिखाई देगा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भ्रष्टाचार वहीं होता है जहां कोई जवाबदेही या पारदर्शिता नहीं होती और यह प्रणाली इन दोनों कार्यों पर लगाम लगाएगी।
कोई भी फाइल अब यूं ही ‘गुम’ नहीं होगी
अमन अरोड़ा ने जोर देकर कहा कि “डिजी पंजाब” केवल एक आई.टी. प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह मुख्यमंत्री मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के फाइलों से अधिक नागरिकों को प्राथमिकता देने के साझा संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “दिहाड़ी मजदूर को अब प्रमाण पत्र लेने के लिए अपनी दिहाड़ी खराब करने की आवश्यकता नहीं होगी। सीमावर्ती गांव के एक विद्यार्थी को भी वही पहुंच मिलेगी जो चंडीगढ़ में बैठे किसी व्यक्ति को मिलती है।” उन्होंने कहा कि अब हर आवेदन को ट्रैक किया जाएगा, समय-सीमा निर्धारित की जाएगी और संबंधित कर्मचारी को जवाबदेह बनाया जाएगा और अब कोई भी ऐसी फाइल यूं ही ‘गुम’ नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जहां तकनीक नहीं पहुंच सकती, वहां हमारे सेवा केंद्र और डोरस्टेप डिलीवरी सेवा 1076 एक पुल के रूप में कार्य करना जारी रखेंगे।
